खतौली। नगर में जीटी रोड स्थित एक बैंकट हॉल में आयोजित ऑल इंडिया मुशायरे में देश के विभिन्न हिस्सों से आए नामचीन शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश कर श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। उर्दू अदब, साहित्य और आपसी भाईचारे की खुशबू से महके इस आयोजन में शायरी के रंगों ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता बार-बार दाद देने को मजबूर हो गए।
नगर में आयोजित इस साहित्यिक आयोजन का शुभारंभ हाजी नौशाद अहमद उर्फ मोनी ने फीता काटकर किया। इसके बाद माज अहमद मोनी ने शमा रोशन कर मुशायरे की विधिवत शुरुआत कराई। कार्यक्रम की अध्यक्षता हाजी अखलाक आढ़ती ने की, जबकि निजामत का दायित्व मशहूर शायर नदीम फर्रुख ने अपने खास अंदाज में निभाया। उनके प्रभावशाली संचालन ने पूरे कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा।
अपने संबोधन में हाजी अखलाक आढ़ती ने कहा कि मुशायरे केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे समाज को जोड़ने, साहित्य को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण मंच भी हैं। वहीं हाजी नौशाद अहमद मोनी ने कहा कि उर्दू भाषा और शायरी प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देती है तथा ऐसे आयोजनों से सामाजिक सौहार्द को मजबूती मिलती है।
मुशायरे में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए शायरों ने देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, प्रेम, मानवीय रिश्तों और समसामयिक विषयों पर आधारित एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं। शायरों के प्रभावशाली अंदाज और उम्दा अशआर पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं और “वाह-वाह” तथा “मुकर्रर अर्ज है” की आवाजों से पूरा पंडाल गूंज उठा।
कार्यक्रम के कन्वीनर अमजद आतिश और नवेद सिद्दीकी रहे। आयोजन को सफल बनाने में परवेज गाजी, हुस्साम भाई, सोनू फरीदी तथा मुशायरा कमेटी के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुशायरे में नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, बुद्धिजीवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहें।
देर रात तक चले इस शानदार आयोजन का समापन उर्दू साहित्य के प्रचार-प्रसार, आपसी सौहार्द और भाईचारे के संदेश के साथ हुआ। कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शायरी लोगों के दिलों को जोड़ने की अद्भुत शक्ति रखती है।






