आयुष मलिक प्रकरणः स्वामी यशवीर पीछे हटे, जाट नेताओं ने संभाला मोर्चा

स्वामी यशवीर की शामली में हिंदू पंचायत निरस्त, राकेश टिकैत ने संवाद को बताया समाधान, धर्मवीर ने समाज की ताकत का दिया संदेश

मुजफ्फरनगर। आयुष मलिक धर्म परिवर्तन प्रकरण में पिछले कई दिनों से बढ़ते सामाजिक और धार्मिक तनाव के बीच अब घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। आयुष की घर वापसी और आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर 12 जून को शामली में प्रस्तावित हिंदू पंचायत को योग साधना आश्रम बघरा के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर ने अचानक निरस्त कर दिया। स्वामी यशवीर ने पंचायत स्थगित करने के पीछे पुलिस कार्रवाई पर संतोष और आयुष के भविष्य में सनातन धर्म में लौटने की उम्मीद को कारण बताया है। दूसरी ओर, मामले में अब जाट समाज के प्रमुख नेताओं की सक्रिय एंट्री हो गई है। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने पंचायत और प्रदर्शन की बजाय समझाइश को बेहतर रास्ता बताया, जबकि जाट महासभा के अध्यक्ष धर्मवीर बालियान ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि समाज बड़ी शक्ति है और यदि आयुष नहीं माना तो समाज के पास अपने तरीके से कार्रवाई करने की क्षमता भी है।

राकेश टिकैत बोले-धर्म दिन में तीन बार बदले, जाति नहीं बदलती

उत्तर प्रदेश के शामली में चर्चित आयुष मलिक प्रकरण को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है और ऐसे मामलों का समाधान प्रदर्शन के बजाय संवाद और समझाइश से निकाला जाना चाहिए। राकेश टिकैत ने कहा कि यदि कोई युवक या युवती अपना निर्णय ले चुका है, तो धरना-प्रदर्शन से कोई विशेष परिणाम नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि परिवार के लोग आयुष को दोबारा समझा सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर वे स्वयं भी समझाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि विवाह करना कोई गलत बात नहीं है। प्रकरण पर अपनी राय रखते हुए टिकैत ने कहा कि धर्म व्यक्ति दिन में कई बार भी बदल सकता है, लेकिन उसकी जाति नहीं बदलती। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे अनेक उदाहरण मौजूद हैं, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग विवाह कर एक साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। विवाह के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक नहीं है।

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स्वामी यशवीर महाराज द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन के संबंध में पूछे गए सवाल पर टिकैत ने कहा कि प्रदर्शन से समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि समाज को ज्ञान देने की आवश्यकता है। धार्मिक और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा, सत्संग और सकारात्मक विचारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि अच्छे विचार और संवाद ही समाज को सही दिशा दे सकते हैं। टिकैत ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के अनुसार जीवन जीने और निर्णय लेने का अधिकार देता है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं अपने निर्णय पर अडिग है, तो उस पर किसी प्रकार का दबाव बनाना उचित नहीं है।

धर्मवीर बालियान ने कहा-समाज को साथ लेकर निकालेंगे समाधान, नहीं माना तो लट्ठ तैयार

आयुष मलिक धर्मांतरण प्रकरण को लेकर जाट महासभा के अध्यक्ष धर्मवीर बालियान ने परिवार, समाज और दोनों समुदायों के जिम्मेदार लोगों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक या जातीय तनाव पैदा करना उचित नहीं है। समाज का प्रयास होना चाहिए कि संवाद और समझाइश के माध्यम से समाधान निकले। मीडिया से बातचीत में धर्मवीर बालियान ने कहा कि आयुष मलिक का मामला उनके संज्ञान में सोशल मीडिया के माध्यम से आया। इसके बाद उन्होंने आयुष के पिता देवराज मलिक से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि यदि परिवार को पहले से स्थिति का आभास था तो समाज को समय रहते विश्वास में लिया जाना चाहिए था, जिससे सामूहिक स्तर पर प्रयास किए जा सकते थे।

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बालियान ने कहा कि समाज एक बड़ी शक्ति है और कठिन परिस्थितियों में परिवार के साथ खड़ा रहता है। उनका मानना है कि ऐसे मामलों में समाज और परिवार को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले आयुष को समझाने और संवाद के माध्यम से उसकी बात जानने का प्रयास होना चाहिए। समाज बड़ी शक्ति है, समझाएंगे नहीं माना तो समाज के पास लट्ठ भी तो है। मंदिर और धार्मिक संस्कारों को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि केवल मंदिर जाना ही संस्कारों का मापदंड नहीं है। जाट समाज का बड़ा वर्ग आर्य समाज की विचारधारा से जुड़ा रहा है और वहां भी मजबूत सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्कारों की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि मंदिर आस्था के केंद्र हैं, लेकिन अच्छे संस्कारों का दायरा इससे कहीं व्यापक है।

जाट महासभा अध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकरण में आयुष के नाम से अधिक उसकी जाति को लेकर टिप्पणियां की जा रही हैं, जो उचित नहीं है। किसी भी बिरादरी को निशाना बनाने से समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मामले को जातीय रंग देने से बचें। बालियान ने कहा कि मुजफ्फरनगर अतीत में 2013 के सांप्रदायिक तनाव का दौर देख चुका है, इसलिए सभी पक्षों को जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि कुछ लोग इस मामले को विवाद का रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन समाज को ऐसी कोशिशों को सफल नहीं होने देना चाहिए।

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उन्होंने हाईवे स्थित होटल पर एक हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा हुए विरोध प्रदर्शन और हंगामे की भी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे मामलों का समाधान उग्र प्रदर्शन नहीं, बल्कि बातचीत और सामाजिक सहयोग से निकलता है। बालियान ने कहा कि समाज का उद्देश्य किसी टकराव को बढ़ाना नहीं, बल्कि परिवार और समाज के हित में सकारात्मक रास्ता निकालना होना चाहिए। धर्मवीर बालियान ने कहा कि दोनों समुदायों के जिम्मेदार लोगों को आगे आकर माहौल को शांत रखने और विवाद को बढ़ने से रोकने की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि संवाद और सामाजिक प्रयासों के माध्यम से इस पूरे प्रकरण का शांतिपूर्ण समाधान निकलेगा। गौरतलब है कि धर्मवीर बालियान इन दिनों चीन दौरे पर हैं। उन्होंने यह बयान अपने विदेश प्रस्थान से पहले मीडिया से बातचीत के दौरान दिया था।

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