नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने शुक्रवार को सात मामलों में उनकी दोषसिद्धि और तीन महीने की साधारण कैद की सजा बरकरार रखते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को राजपाल यादव को दोबारा जेल भेजने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने भुगतान को लेकर दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं होने पर कड़ा रुख अपनाया।
यह विवाद वर्ष 2010 में लिए गए करीब पांच करोड़ रुपये के फिल्म निर्माण ऋण से जुड़ा है। राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से रकम ली थी।
कर्ज की वापसी के लिए जारी किए गए कई चेक बैंक में भुगतान के बिना लौट गए थे। इसके बाद कंपनी ने निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत चेक बाउंस की शिकायतें दर्ज कराईं।
मामले में ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2024 में राजपाल यादव और संबंधित पक्ष को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इन आदेशों के खिलाफ अभिनेता की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को समझौते का अवसर दिया था। अभिनेता की ओर से कुछ राशि का भुगतान भी किया गया, लेकिन शेष रकम को लेकर अंतिम समझौता नहीं हो सका।
मामले में ऋण, ब्याज और अन्य देनदारियों को मिलाकर बकाया राशि करीब नौ करोड़ रुपये बताई गई है। अदालत ने माना कि लंबे समय तक अवसर मिलने के बावजूद भुगतान संबंधी आश्वासन पूरे नहीं हुए।
फरवरी 2026 में भी राजपाल यादव ने अदालत के निर्देश पर तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया था। बाद में सजा पर अस्थायी रोक मिलने के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया, ताकि भुगतान और समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
अब हाईकोर्ट ने उनकी याचिकाएं खारिज करते हुए दोषसिद्धि और तीन महीने की सजा को कायम रखा है। आदेश के बाद राजपाल यादव को शेष सजा पूरी करने के लिए वापस जेल भेजे जाने की प्रक्रिया होगी।
