एसडीएम जानसठ नहीं उठा रही फोन, जेसीबी लेकर मस्जिद पर जायेंगे विक्रम सैनी

कवाल सहित कई गांवों में जलभराव को लेकर पूर्व विधायक विक्रम सैनी ने अधिकारियों पर साधा निशाना, कई गांवों में कृषि भूमि जलमग्न, फसल खराब होने का आरोप

मुजफ्फरनगर। तहसील जानसठ क्षेत्र के कई गांवों में बरसात के पानी से कृषि भूमि जलमग्न होने का मामला सामने आया है। पूर्व विधायक विक्रम सैनी ने इस समस्या को लेकर अधिकारियों पर संवेदनहीनता और लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रशासन से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।

पूर्व विधायक के अनुसार, जानसठ तहसील क्षेत्र के भलेड़ी, कवाल, काटका और सादपुर पिमोड़ा समेत कई गांवों का कृषि रकबा बरसात के पानी में डूबा हुआ है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर हालात बाढ़ जैसे बने हुए हैं और खेतों में पानी भरने के कारण किसानों की फसल खराब होने की स्थिति पैदा हो गई है। जलभराव के चलते ग्रामीणों और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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विक्रम सैनी ने बुधवार को अपनी फेसबुक पोस्ट में दावा किया कि बुधवार को भलेड़ी गांव के सैकड़ों ग्रामीण उनके पास पहुंचे और जलभराव की समस्या से अवगत कराया। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर को एसएमएस के माध्यम से सूचना देने के साथ ही फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि फोन रिसीव नहीं हो सका, संभवतरू जिलाधिकारी किसी बैठक में रहे होंगे। पूर्व विधायक ने जानसठ की उप जिलाधिकारी रश्मि लांबा पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उप जिलाधिकारी लोगों के फोन रिसीव नहीं करतीं, जिससे क्षेत्र की समस्याओं के समाधान को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। हालांकि, ये आरोप पूर्व विधायक की ओर से सोशल मीडिया पर लगाए गए हैं।

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उन्होंने संबंधित अधिकारियों से गांवों में जल निकासी की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की। विक्रम सैनी ने चेतावनी दी कि यदि अगले दिन तक पानी की निकासी नहीं कराई गई तो वह ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचेंगे और जेसीबी मशीन की मदद से पानी की निकासी में बाधा बने अवरोध को हटवाएंगे। पूर्व विधायक ने विशेष रूप से सादपुर गांव की मस्जिद के सामने पानी की निकासी में अवरोध पैदा होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया तो ग्रामीणों के साथ मिलकर स्वयं अवरोध हटाने की कार्रवाई की जाएगी। मामले को लेकर अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की ओर है। जलभराव से प्रभावित किसानों का कहना है कि यदि खेतों से जल्द पानी नहीं निकाला गया तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।

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