भाकियू अराजनैतिक ने जताया मुख्यमंत्री योगी का आभार, संगठन ने उठाया था मुद्दा, फार्मर आईडी में गड़बड़ी होने पर पिछले साल की तरह पंजीकरण कराने की मिली सुविधा
मुजफ्फरनगर। धान खरीद के लिए फार्मर आईडी और एग्रीस्टैक की अनिवार्यता के चलते किसानों को आ रही परेशानियों पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) की पहल के बाद प्रदेश सरकार ने राहत देने का निर्णय लिया है। संगठन के प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने बताया कि शासन ने धान खरीद नीति में संशोधन करते हुए किसानों को फार्मर आईडी के स्थान पर पिछले वर्ष की भांति पंजीकरण कराने का विकल्प भी उपलब्ध करा दिया है। सरकार के इस फैसले पर संगठन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है।
भाकियू अराजनैतिक की ओर से 29 अक्टूबर को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर धान खरीद पंजीकरण में आ रही तकनीकी समस्याओं से अवगत कराया गया था। संगठन ने मंडल स्तर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। संगठन का कहना था कि एग्रीस्टैक और डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज गलतियों के कारण बड़ी संख्या में किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने के लिए पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं। कहीं फसल का विवरण गलत दर्ज हो रहा है तो कहीं गाटा संख्या संबंधी त्रुटियों के कारण किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

उन्होंने बताया कि संगठन की मांग पर शासन के खाद्य एवं रसद अनुभाग-4 ने चार नवंबर 2026 को शासनादेश संख्या 666/29-4-2026/ई-163/2026 जारी कर धान क्रय नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इसके तहत जिन किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है और वे उसमें दर्ज विवरण से संतुष्ट हैं, वे उसके आधार पर पंजीकरण करा सकते हैं। वहीं, जिन किसानों को फार्मर आईडी के विवरण में कोई त्रुटि दिखाई देती है या वे उससे संतुष्ट नहीं हैं, उन्हें पिछले वर्ष की तरह पंजीकरण कराने की सुविधा दी गई है।
भाकियू अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने मुख्यमंत्री को भेजे आभार पत्र में कहा कि संगठन ने किसानों की व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए तकनीकी त्रुटियों का खामियाजा किसानों को नहीं भुगतने देने की मांग की थी। सरकार ने इस पर संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित निर्णय लिया है। इससे प्रदेश के लाखों किसानों को राहत मिलेगी और वे तकनीकी खामियों के कारण सरकारी खरीद व्यवस्था से बाहर होने से बच सकेंगे। उन्होंने कहा कि अब किसान अपनी सुविधा के अनुसार पंजीकरण कराकर सरकारी क्रय केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ लेते हुए धान बेच सकेंगे। संगठन ने किसानों की मांग स्वीकार करने और धान खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए मुख्यमंत्री तथा प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है।
