वाल्मीकि समाज की दबंग आवाज हुई खामोश, कुल्लन देवी का निधन

लंबी बीमारी के कारण शुक्रवार सुबह आबकारी किला मौहल्ला स्थित आवास पर ली अंतिम सांस
भगवत प्रसाद मकवाना और मंत्री कपिल देव सहित गणमान्य लोगों ने अंतिम दर्शन कर दी श्रद्धांजलि

मुजफ्फरनगर। वाल्मीकि समाज की प्रमुख सामाजिक एवं श्रमिक नेता और सेवानिवृत्त शिक्षिका कुल्लन देवी का शुक्रवार तड़के करीब चार बजे आबकारी किला मोहल्ला स्थित उनके आवास पर लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया। वह 76 वर्ष की थीं। उनके निधन की सूचना मिलते ही वाल्मीकि समाज के साथ ही विभिन्न सामाजिक वर्गों में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचे और अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

वाल्मीकि समाज के लिए दबंग आवाज और लड़ाका माने जाने वाली कुल्लन देवी लंबे समय से सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय थीं और वाल्मीकि समाज से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाती रही थीं। नगर पालिका परिषद के सफाई कर्मचारी संघ की लीडरशिप करते हुए उन्होंने सफाई कर्मचारियों के अधिकारों और हितों के लिए कई बार आवाज बुलंद की। अपने स्पष्ट और बेबाक नेतृत्व के चलते उन्होंने वाल्मीकि समाज में अलग पहचान बनाई थी।

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बताया जाता है कि वर्ष 1990 में उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री बूटा सिंह की मुजफ्फरनगर शहर में बड़ी रैली आयोजित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बाद उनकी सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता और अधिक चर्चा में आई। नगर पालिका में भाजपा चेयरमैन जगदीश भाटिया के शुरुआती कार्यकाल के दौरान सफाई कर्मचारियों के हितों की अनदेखी के आरोपों को लेकर उन्होंने कामबंद हड़ताल का नेतृत्व किया था। वर्ष 2000 की इस हड़ताल को नगर के सफाई कर्मचारी आंदोलनों में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में याद किया जाता है। उनके नेतृत्व में सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर संगठित होकर आवाज उठाई थी।

प्रशासन के साथ भी कई मौकों पर उनके मतभेद सामने आए। तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह के कार्यकाल में सरकारी विद्यालय में अनुपस्थित रहने के मामले में उन्हें निलंबित किया गया था। इसके बावजूद उन्होंने सामाजिक गतिविधियां जारी रखीं। बाद में राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के उद्देश्य से उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में भी सक्रियता बढ़ाई, हालांकि उन्हें चुनावी टिकट नहीं मिल सका। कुल्लन देवी का सामाजिक दायरा केवल वाल्मीकि समाज तक सीमित नहीं था। उनके आवास पर वाल्मीकि समाज के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मुस्लिम समाज सहित विभिन्न वर्गों के गणमान्य लोगों की भी मौजूदगी रही। लंबे समय तक सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण विभिन्न समुदायों के लोगों से उनके संबंध रहे।

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शुक्रवार को उनके निधन का समाचार पाकर राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना ने उनके आवास पर पहुंचकर अंतिम दर्शन किए और श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्तर प्रदेश सरकार में कौशल विकास राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल सहित अन्य भाजपा नेताओं ने भी पहुंचकर शोक व्यक्त किया। इसके साथ ही इमाम संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुफ्ती जुल्फिकार और अन्य मुस्लिम नेताओं ने उनको आवास पर पहुंचकर खिराजे अकीदत पेश की। बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों और परिचितों ने भी उनके निधन पर संवेदना जताई।

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उनके पति राजू मचल के अनुसार, कुल्लन देवी पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं। शुक्रवार को निधन के बाद दोपहर में काली नदी श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन से वाल्मीकि समाज में लंबे समय तक सक्रिय रही एक प्रमुख सामाजिक आवाज का अंत हुआ है। समाज के लोगों ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक समाज के मुद्दों को मजबूती से उठाने और सफाई कर्मचारियों को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोपहर बाद उनका काली नदी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें हजारों लोग मौजूद रहे। इस दौरान मुख्य रूप से राजू मचल, नीरज बिडला, अमित सुधा, नितिन बिडला, राजू वैद, चमनलाल ढींगान, राजेश उटवाल, राजकुमार बेनीवाल, सोनू वाल्मीकि, मिलन बिडला, सोनू मचल आदि मौजूद रहे।

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