छपार टोल प्लाजा पर भाकियू अराजनैतिक का हंगामा, टोल कराया फ्री

कर्मचारियों पर ग्रामीणों से अभद्रता और अवैध वसूली के आरोप, टोल लेन पर धरना, कर्मियों से हुई नोकझोंक, पुलिस ने संभाला मोर्चा

मुजफ्फरनगर। दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे-58 स्थित छपार टोल प्लाजा पर कर्मचारियों के कथित तानाशाही रवैये के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने मोर्चा खोल दिया। मंडल महासचिव विपिन त्यागी बरला के नेतृत्व में पहुंचे यूनियन कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार की सुबह बारिश के बीच ही टोल प्लाजा पर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया और टोल लेन पर दरी बिछाकर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने टोल को फ्री करा दिया, जिससे टोल प्रबंधन में हलचल मच गई।

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यूनियन पदाधिकारियों का आरोप है कि टोल प्लाजा पर तैनात कर्मचारी स्थानीय किसानों, गामीणों और आम राहगीरों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। इसके अलावा वाहन चालकों से जबरन अवैध वसूली किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। किसान नेताओं का कहना है कि इस संबंध में पहले भी टोल प्रबंधन से शिकायत की गई, लेकिन कर्मचारियों के व्यवहार और कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी से नाराज होकर संगठन को धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

टोल प्लाजा के कर्मचारी और प्रबंधक धरना दे रहे किसानों के पास पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं को समझाने और टोल लेन से हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई। किसान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों पर अड़े रहते हुए धरना जारी रखा। विरोध प्रदर्शन के कारण टोल प्लाजा पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई और वाहनों की आवाजाही पर भी असर पड़ा।

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भाकियू अराजनैतिक के मंडल महासचिव विपिन त्यागी बरला ने कहा कि टोल कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर किसानों और आम लोगों में नाराजगी है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती और टोल प्लाजा की व्यवस्था में सुधार नहीं किया जाता, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। यूनियन पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और टोल संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए टोल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद छपार पुलिस मौके पर पहुंची और यूनियन पदाधिकारियों से बातचीत की। पुलिस ने टोल प्रबंधन और किसान नेताओं के बीच वार्ता कराकर विवाद सुलझाने का प्रयास किया। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता धरने पर जमे हुए थे। किसान संगठन की मांग है कि शिकायतों का निस्तारण कर टोल प्लाजा पर ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे स्थानीय किसानों और राहगीरों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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