महर्षि चरक अस्पताल में दलित महिला के उपचार में लापरवाही, वीडियो वायरल

स्वामी यशवीर ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर उठाया मामला, जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग से निष्पक्ष मेडिकल जांच कराने की मांग

मुजफ्फरनगर। शहर के रुड़की चुंगी स्थित संचालित महर्षि चरक अस्पताल में एक गर्भवती दलित महिला के उपचार को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। योग साधना आश्रम बघरा के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर ने सोशल मीडिया पर पीड़ित परिवार के एक व्यक्ति का वीडियो पोस्ट करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। वीडियो में परिवार की ओर से अस्पताल में उपचार के दौरान कथित लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं।

स्वामी यशवीर की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, बघरा निवासी एक दलित परिवार की गर्भवती महिला को उपचार के लिए महर्षि चरक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार का आरोप है कि अस्पताल में चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि गर्भ में पल रहे बच्चे की धड़कन बंद हो चुकी है और महिला की चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत सफाई करनी होगी।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में प्रक्रिया किए जाने के बाद भी गर्भ का कुछ हिस्सा महिला के शरीर के भीतर रह गया। इसके बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। परिवार का दावा है कि बाद में घर पर मृत शिशु बाहर निकल आया। परिजनों ने सवाल उठाया कि यदि बच्चे को ऑपरेशन के माध्यम से निकाल दिया गया था तो बाद में घर पर शिशु बाहर कैसे आया। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे उपचार के लिए दूसरे अस्पताल में भर्ती कराए जाने की बात भी सामने आई है।

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मामले को लेकर स्वामी यशवीर ने जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष मेडिकल जांच कराने की मांग की है। उन्होंने उपचार से संबंधित दस्तावेज, जांच रिपोर्ट, ऑपरेशन अथवा चिकित्सकीय प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य मेडिकल रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। स्वामी यशवीर ने आरोप लगाया कि यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और न्याय मिलना चाहिए तथा चिकित्सा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

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सफाई के नाम पर लिए 40 हजार, फिर भी नहीं किया सही उपचार

स्वामी यशवीर ने इस मामले में एक वीडियो भी पोस्ट किया है। इसमें युवक ने अपना नाम रवि चन्द्रा निवासी बघरा बताते हुए जानकारी दी कि उनकी पत्नी के पेट में अचानक ही तेज दर्द हुआ, वो महर्षि चरक अस्पताल लेकर गया। वहां पर डॉ. शोएब आलम और उनकी पत्नी के साथ ही डॉ. नईम खान मिले।

अल्ट्रासाउंड में देखकर डॉ. शोएब आलम की पत्नी ने बताया कि बच्चे की धड़कन नहीं है, सफाई करनी होगी, वरना महिला को खतरा है, खर्च 40 हजार रुपये बताया गया, मैंने पैसा जमा करके उपचार कराया, लेकिन गलत उपचार किया। उपचार के बाद भी तेज दर्द बना रहा। छुट्टी के बाद भी हालत गंभीर होती रही। सफाई के दो दिन बाद तेज दर्द में शौचालय गई, वहीं पर बच्चा निकल गया।

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महर्षि का नाम, डॉक्टर मुस्लिम, अस्पताल का नाम बदलने की मांग

सोशल मीडिया पोस्ट में अस्पताल के नाम को लेकर भी स्वामी यशवीर ने सवाल उठाए और अस्पताल से महर्षि चरक नाम हटाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अभी तक कांवड़ यात्रा मार्ग पर ही मुस्लिमों के द्वारा हिंदू प्रतीकों और देवी देवताओं के नाम पर होटल-ढाबे खोले जा रहे थे, अब हिंदू समाज के महर्षि के नाम पर मुस्लिम चिकित्सक अस्पताल चलाकर धोखा दे रहे हैं। उन्होंने महर्षि चरक अस्पताल के संचालक डॉ. नईम और डॉ. सुहैल की भी जांच कराने की मांग की है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से इन आरोपों पर कोई पक्ष या आधिकारिक प्रतिक्रिया इस प्रकरण में सामने नहीं आई है। स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही यह निर्धारित किया जा सकेगा कि उपचार में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं।

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