दिवाकर का फैसलाः दोहरे हत्याकांड में पति को आजीवन कारावास

दहेज की मांग को लेकर पति करता था पत्नी को प्रताड़ित, कोर्ट ने 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया

आठ माह की गर्भवती पत्नी, अजन्मे बच्चे की हत्या में राशिद को मिली उम्रकैद, सास-ससुर साक्ष्य के अभाव में बरी

मुजफ्फरनगर। दहेज उत्पीड़न और आठ माह की गर्भवती पत्नी की हत्या के बहुचर्चित मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश ने पति को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण सास और ससुर को आरोपों से बरी कर दिया गया।

अभियोजन के अनुसार, बागपत जनपद के थाना रमाला क्षेत्र के गांव असारा निवासी जहीरुद्दीन ने शाहपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया था कि उनकी भतीजी शबाना का विवाह 28 मई 2020 को शाहपुर क्षेत्र के गांव कसेरवा निवासी राशिद से हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद से ही पति और ससुराल पक्ष के लोग अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर शबाना का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करने लगे। आरोप था कि पति बाइक की मांग को लेकर लगातार उसे प्रताड़ित करता था।

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इस मामले में पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मुकदमे के मुताबिक, 19 अप्रैल 2024 की शाम शबाना ने अपने चाचा को फोन कर उसके साथ पति और अन्य ससुरालियों के द्वारा मारपीट की जानकारी दी थी। अगले दिन परिजन उसे लेने ससुराल पहुंचे तो शबाना मृत मिली। उस समय वह करीब आठ माह की गर्भवती थी। घटना के बाद पति, सास-ससुर समेत कई अन्य परिजनों के खिलाफ दहेज हत्या और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया।

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विवेचना के दौरान पुलिस को पति राशिद, सास जैबुन उर्फ जैबुनिशा और ससुर जाहिद के खिलाफ पर्याप्त आधार मिले, जबकि अन्य नामजद आरोपितों के विरुद्ध साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें आरोप-पत्र से बाहर कर दिया गया। पुलिस ने 14 जुलाई 2024 को न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया। आरोपी राशिद तीन जून 2024 से न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार में बंद है।

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मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट-3) रवि कुमार दिवाकर की अदालत में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने शबाना और उसके अजन्मे बच्चे की हत्या का दोषी मानते हुए पति राशिद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा 40 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। वहीं, साक्ष्य के अभाव में सास जैबुनिशा और ससुर जाहिद को दोषमुक्त करार दिया गया।

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