दोनों पुत्रों पूर्व विधायक नवाजिश आलम और रविश आलम के साथ सैंकड़ों समर्थकों ने भी पार्टी की सदस्यता की ग्रहण
नई दिल्ली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में चार दशक से अधिक समय से सक्रिय पूर्व सांसद अमीर आलम खान और पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े कई नेताओं, पूर्व जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने भी कांग्रेस का दामन थामा।
प्रेस वार्ता के दौरान उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, अनुसूचित जाति विभाग राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और सहारनपुर सांसद इमरान मसूद मौजूद रहे। कांग्रेस के अनुसार पूर्व सांसद अमीर आलम खान, पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान, उत्तर प्रदेश भारतीय चिकित्सा परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद अकरम और रविश आलम खान के साथ करीब 15 पूर्व प्रधान, पूर्व जिला पंचायत सदस्य तथा लगभग 40 कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ली। इसी क्रम में एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष टीपी सिंह सहित नौ साथियों और आम आदमी पार्टी के 13 कार्यकर्ताओं ने भी कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

अमीर आलम खां करीब 45 साल से सक्रिय राजनीति में हैं। वो लोकसभा सांसद रहे। राज्यसभा सदस्य रहे और तीन बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य भी निर्वाचित हुए। वो उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री पद पर रहे और वक्फ बोर्ड के चेयरमैन की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने चौधरी चरण सिंह, वीपी सिंह और मुलायम सिंह के साथ ही अजित सिंह की पार्टी से चुनाव लड़े। साल 1985 में उन्होंने अपना पहला चुनाव लोक दल के टिकट पर थानाभवन सीट से लड़ा और चौधरी चरण सिंह की पार्टी से विधायक बने। इसके बाद 1989 में वो मोरना से विधायक बने और इसके फिर से थानाभवन से चुनाव जीते। 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर कैराना से लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए। 2004 में वो राज्यसभा सदस्य बने।
इसके बाद भी उन्होंने 2012 में समाजवादी पार्टी से अपने पुत्र नवाजिश आलम को बुढ़ाना से चुनाव लड़वाया और विधायक बनाया। 2017 में आलम बसपा में गये और नवाजिश को टिकट दिलाकर चुनाव लड़ाया, लेकिन यह चुनाव नवाजिश हार गये। इसके बाद वो परिवार सहित रालोद में चले गये और 2022 के यूपी विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी से टिकट नहीं मिलने के कारण उनको मोहभंग हुआ और उन्होंने जनवरी 2025 में रालोद को छोड़ने के बाद फरवरी 2025 में आजाद समाज पार्टी कांशीराम का रुख करते हुए चंद्रशेखर आजाद से हाथ मिलाया, लेकिन चंद्रशेखर से भी टिकट की आस पूरी नहीं होने पर अमीर आलम खां अब कांग्रेस में पहुंचे हैं। अमीर आलम खां के दलबदल के सफर में कांग्रेस उनका सातवां सियासी पड़ाव है। यूपी में कांग्रेस का समाजवादी पार्टी से गठबंधन है।
