गंगोह फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र मामला: पंचायत सहायक साबिर गिरफ्तार

पंचायत सचिव और सहायक के खिलाफ 18 अगस्त को दर्ज हुआ था मुकदमा; आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेजने का पुलिस का दावा।

गंगोह। गंगोह फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र मामले में पुलिस ने शुक्रवार को खानपुर गुर्जर निवासी ग्राम पंचायत सहायक साबिर को गिरफ्तार कर लिया। उस पर कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर विधवा पेंशन दिलाने और सरकारी धन के दुरुपयोग में शामिल होने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, न्यायालय में पेश करने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

 

18 अगस्त को दर्ज हुआ था मुकदमा

 

सहायक विकास अधिकारी पंचायत कुशलपाल सिंह की तहरीर पर 18 अगस्त को गंगोह थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे में ग्राम पंचायत अधिकारी गौरव शर्मा और पंचायत सहायक साबिर पुत्र साजिद को नामजद किया गया।

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तहरीर में आरोप लगाया गया कि खानपुर गुर्जर ग्राम पंचायत में फर्जी तरीके से मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए गए। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर कथित रूप से विधवा पेंशन का लाभ दिलाया गया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ।

 

सीआरएस पोर्टल की आईडी के दुरुपयोग का आरोप

 

इस मामले की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने दो सदस्यीय समिति से जांच कराई थी। जांच में सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) पोर्टल पर किए गए कार्यों और संबंधित अभिलेखों की पड़ताल की गई।

 

प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के अनुसार ग्राम पंचायत अधिकारी गौरव शर्मा ने सरकारी पोर्टल की अपनी आईडी और पासवर्ड पंचायत सहायक को उपलब्ध कराए थे। आरोप है कि इसके बाद पोर्टल का इस्तेमाल कर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए गए और कुछ प्रमाणपत्र बाद में निरस्त भी किए गए।

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जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने ग्राम पंचायत अधिकारी गौरव शर्मा को निलंबित कर दिया था। पंचायत सहायक साबिर की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने और दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए थे।

 

गिरफ्तारी के बाद न्यायालय में पेशी

 

प्रभारी निरीक्षक इन्द्रेश कुमार के नेतृत्व में गंगोह पुलिस ने शुक्रवार को मुकदमे में वांछित साबिर को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

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जांच में सामने आएंगे प्रमाणपत्र और धनराशि के आंकड़े

 

पुलिस मामले में ग्राम पंचायत अधिकारी गौरव शर्मा की भूमिका सहित अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कुल कितने कथित फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हुए, कितने लोगों को पेंशन मिली और सरकारी धन को कितनी आर्थिक क्षति हुई।

 

पुलिस की जांच पूरी होने और संबंधित अभिलेखों के सत्यापन के बाद मामले में अन्य लोगों की भूमिका तथा आगे की कार्रवाई स्पष्ट होने की संभावना है।

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