जयंत पर ‘चवन्नी वाली बयानबाजी को लेकर सपा पर बरसीं मिथलेश पाल, बेटी सुप्रिया ने भी दिखाए तेवर, अखिलेश और श्यामपाल पर रालोद विधायक का पलटवार, मिथलेश पाल बोलीं- सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
मुजफ्फरनगर। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल की ओर से राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर की गई ‘चवन्नी’ वाली सियासी टिप्पणी के बाद समाजवादी पार्टी के खिलाफ रालोद नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। इसी क्रम में मीरापुर की रालोद विधायक मिथलेश पाल और उनकी पुत्री सुप्रिया पाल ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वीडियो संदेश जारी कर सपा नेताओं के बयानों की कड़ी निंदा करने के साथ ही इसे पूरी किसान बिरादरी और अति पिछड़ों का अपमान करार देते हुए 2027 में जनता की ओर से एक यादगार जवाब दिये जाने का दावा किया है।
मीरापुर विधायक मिथलेश पाल पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ हैं और पूरी तरह से बैड रेस्ट पर हैं, उन्होंने अपनी फेसबुक वॉल से एक वीडियो बयान पोस्ट किया है, इसमें उन्होंने कहा कि श्यामलाल पाल द्वारा जयंत चौधरी के संबंध में की गई टिप्पणी बेबुनियाद और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने हमेशा किसानों, मजदूरों, दलितों और पिछड़ों के उत्थान के लिए संघर्ष किया। उनके अनुसार, चौधरी अजीत सिंह ने भी चरण सिंह की नीतियों और विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए किसानों के हित में लगातार संघर्ष किया और आंदोलन किए। अब चौधरी जयंत सिंह भी किसान, कमेरा और पिछड़ों के साथ साथ अल्पसंख्यकों के हितों को लेकर काम कर रहे हैं।
मीरापुर से एनडीए की विधायक मिथलेश पाल ने कहा कि रालोद हमेशा अपने बलबूते पर राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई लड़ता रहा है और आगे भी संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने दावा किया कि अति पिछड़े वर्ग सहित किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने में चौधरी अजीत सिंह और जयंत चौधरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनको चार बार चुनाव लड़वाने का अवसर मिला और मीरापुर उप चुनाव में जयंत चौधरी ने उनको टिकट दिलवाकर जीत दिलाने का काम किया। सारिका बघेल भी एक उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि जयंत चौधरी आज भी किसानों के हितों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और चौधरी चरण सिंह की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। विधायक ने सपा नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि राजनीतिक और वैचारिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी समाज के सम्मान से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब देगी।

वहीं, मिथलेश पाल की पुत्री सुप्रिया पाल ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सपा नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जयंत चौधरी का अपमान किसानों, मजदूरों और आम जनता की भावनाओं का अपमान है। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी। सुप्रिया पाल ने कहा कि सपा को रालोद के साथ रहे राजनीतिक गठबंधन के दौर को नहीं भूलना चाहिए। उनके अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद के जनाधार और जयंत चौधरी के संघर्ष से सपा को राजनीतिक मजबूती मिली थी। आरएलडी आई रे ने सपा के पक्ष में माहौल बनाने का काम किया था। उन्होंने कहा कि जयंत चौधरी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि चौधरी चरण सिंह की विचारधारा के वाहक हैं, जो किसानों, मजदूरों, अति पिछड़ों और युवाओं के बीच अपनी पकड़ रखते हैं।
उन्होंने दावा किया कि जयंत चौधरी के बढ़ते जनाधार से सपा में बेचैनी है, जिसके चलते अमर्यादित बयानबाजी की जा रही है। सुप्रिया पाल ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता इन बयानों का जवाब देगी और मीरापुर में भी इसका असर देखने को मिलेगा। सुप्रिया पाल वर्तमान में अपनी मां मिथलेश पाल की विधायक प्रतिनिधि के रूप में क्षेत्र में सक्रिय हैं। पाल परिवार उन्हें राजनीतिक विरासत के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ा रहा है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सुप्रिया पाल का नाम मीरापुर की राजनीति में संभावित दावेदार के रूप में चर्चा में है।
अखिलेश दो बार मुख्यमंत्री नहीं बने सुप्रिया जी!
अपनी पोस्ट में विधायक मां मिथलेश पाल की राजनीतिक वारिस के रूप में पहचान बना रही सुप्रिया ने चौधरी चरण सिंह से जयंत चौधरी तक के इतिहास की बात की, लेकिन वो अखिलेश यादव को दो बार का मुख्यमंत्री बताकर अपरिपक्वता को साबित कर गई। उनकी वीडियो कई टेक की शूटिंग के बाद बनाई गई, इसके बाद भी एडिटर ये भूल कट करना भूल गए। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अखिलेश यादव जी आप यूपी में दो बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन अखिलेश दूसरी बार सीएम बनने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वो 15 मार्च 2012 को पहली बार मुख्यमंत्री बने, कार्यभार ग्रहण करने के दौरान उनकी आयु 38 वर्ष थी और इस कारण वो यूपी के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने, लेकिन सिर्फ एक बार, ऐसे में सुप्रिया जी को याद रखना चाहिए कि अखिलेश एक बार ही सीएम बने हैं, दो बार नहीं।
