भ्रष्ट आचरण में फंसे नगरपालिका के एई निर्माण अखंड प्रताप रिलीव!

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् की बोर्ड बैठक में बजट प्रस्ताव रखे जाने से पूर्व ही पालिका के सहायक अभियंता निर्माण अखंड प्रताप सिंह के खिलाफ आक्रोश दिखाई दिया। बोर्ड में दो तिहाई बहुमत के आधार पर एई अखंड के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, इसका दो सभासदों ने सदन में विरोध किया, जिसको लेकर खूब हंगामा हुआ। चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने बहुमत के आधार पर प्रस्ताव स्वीकार कर सदन का मान रखा और एई निर्माण को सदन की भावना के अनुरूप शासन के आदेश का पालन करते हुए पालिका से रिलीव करने के साथ ही उनके खिलाफ आई शिकायतों पर शासन को जांच के लिए संस्तुति भेजने का भरोसा दिलाया है।

नगरपालिका परिषद् की शुक्रवार को टाउनहाल सभाकक्ष में चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप की अध्यक्षता में बोर्ड मीटिंग का आयोजन किया गया। इसमें ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने वार्षिक बजट का एक मात्र प्रस्ताव सदन के सामने रखा। इससे पहले ही सदन में एई निर्माण अखंड प्रताप सिंह के खिलाफ माहौल बना नजर आया। सभासद राजीव शर्मा और मनोज वर्मा ने सदन के दो तिहाई बहुमत के आधार पर एई निर्माण अखंड प्रताप के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया और उनको शासन के आदेशानुसार पालिका से रिलीव करने की मांग चेयरपर्सन से की। इसी बीच सभासद अर्जुन प्रजापति और देवेश कौशिक ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि एई निर्माण के खिलाफ लाये गये प्रस्ताव पर सभासदों को गुमराह कर हस्ताक्षर कराये गये हैं, जबकि सभासद राजीव शर्मा ने दावा किया कि एई के खिलाफ बोर्ड के 42 सभासदों का समर्थन है और सभी इस पक्ष में एक राय हैं कि अपने भ्रष्ट आचरण और नकारात्मक कार्यप्रणाली तथा कुछ चहेते ठेकेदारों को स्वार्थ पूर्ति के लिए अनुचित ढंग से लाभ पहुंचाने का कार्य करते हुए पालिका को बदनाम कर छवि धूमिल करने वाले एई निर्माण अखंड प्रताप को पालिका से रिलीव किया जाये।

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उन्होंने सदन में ही इस प्रस्ताव पर मत विभाजन कराये जाने की मांग भी रखी, लेकिन सदन की सहमति देखते हुए चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए एई निर्माण को रिलीव करने का भरोसा सदन को दिलाया। इसी के साथ सभासदों ने अपने प्रस्ताव में यह भी आरोप लगाया कि एई निर्माण ने अधिशासी अधिकारी को भ्रमित करते हुए कुछ विकास कार्यों की निविदा मनमाने ढंग से निरस्त कराई गयी है। इसमें एई पर ठेकेदारों से अनुचित लाभ दिये जाने के लिए अवैध रूप से धन वसूली के भी आरोप लगाये और कहा कि 10, 15 और 18 फरवरी को निर्माण कार्यों की जो निविदा खोली गई, उनमें शर्तें पूरी होने के बावजूद भी एई निर्माण ने अपने कुछ ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए निविदा निरस्त कर दी। सदन ने मांग की है कि पालिका स्तर पर एक कमेटी का गठन करते हुए एई निर्माण पर लगे आरोपों की जांच कराई जाये इसके साथ ही शासन को भी उनके खिलाफ जांच की संस्तुति भेजी जाये। एई निर्माण अखंड प्रताप के रिलीव होने पर निर्माण विभाग में वैकल्पिक व्यवस्था के लिए एई जलकल सुनील कुमार को अतिरिक्त कार्यभार देने का सुझाव भी सदन को दिया गया है। एई निर्माण के खिलाफ प्रस्ताव देने वालों में मुख्य रूप से सभासद राजीव शर्मा, मनोज वर्मा, नौशाद खां, शौकत अंसारी, इरशाद हकीम, अमित पटपटिया, रजत धीमान, सीमा जैन, हिमांशु कौशिक, रविकांत काका, योगेश मित्तल, बबीता वर्मा, कुसुमलता पाल, प्रशांत गौतम, नवनीत गुप्ता, नौशाद पहलवान, अनीता देवी, हनी पाल, अनुज कुमार, विजय कुमार चिंटू, शाजिया, उमरदराज, सतीश कुमार आदि सभासद शामिल रहे।

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नौ माह पूर्व शासन कर चुका है एई निर्माण का तबादला

मुजफ्फरनगर नगरपालिका के एई निर्माण अखंड प्रताप सिंह का तबादला उत्तर प्रदेश शासन के द्वारा करीब नौ माह पूर्व हो चुका है, लेकिन पालिका में कार्य की आवश्यकता को देखते हुए चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने उनको रिलीव नहीं किया था। बताया गया कि 29 जून 2024 को नगरीय निकाय निदेशालय के निदेशक डॉ. नितिन बंसल के द्वारा एई निर्माण अखंड प्रताप का तबादला आदेश जारी किया था, जिसमें उनको मुजफ्फरनगर पालिका से हटाते हुए नगर निगम अलीगढ़ में तैनात किया गया और उनको तत्काल प्रभाव से आदेशों का अनुपालन करने के लिए कहा गया था। इसी आदेश को सामने रखते हुए सभासदों ने उनको पालिका से रिलीव करने का प्रस्ताव सदन में प्रस्तुत किया और चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप से शासन के आदेश पर कार्यवाही करते हुए उनको रिलीव करने की मांग की है। बता दें कि 27 फरवरी को ही एई निर्माण की शादी हुई है और सभासद इसे उनको शादी का तोहफा बता रहे हैं, जिसकी चर्चा पालिका में खूब होती रही। 

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