पालिका में नई हलचल-हाईकोर्ट तक पहुंची ईओ और टीएओ की लड़ाई

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् में एलईडी स्ट्रीट लाइट प्रकरण में ठेकेदार फर्म की याचिका पर फर्म का टैण्डर निरस्त करने और ब्लेकलिस्ट करने को लेकर आई हाईकोर्ट के आदेश की गरमाहट अभी बनी ही हुई थी, कि अब हाईकोर्ट के एक दूसरे आदेश ने नई हलचल पैदा कर दी है। इस प्रकरण में पालिका के कर निर्धारण अधिकारी ने शासन स्तर से उनके खिलाफ की गई कार्यवाही को नियमों के विपरीत बताते हुए रिट दायर की, जिसमें हाईकोर्ट ने शासन के अधिकारियों के साथ ही पालिका की अधिशासी अधिकारी से भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

बता दें कि नगरपालिका परिषद् के कर निर्धारण अधिकारी दिनेश कुमार यादव और अधिशासी अधिकारी डॉ. प्रज्ञा सिंह के बीच विभागीय कामकाज को लेकर लंबी खींचतान चलती रही। इसी बीच ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने टीएओ दिनेश यादव पर उनके आदेशों की अवहेलना करने सहित अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए शासन को शिकायत की थी, जिसके बाद शासन द्वारा कार्यवाही करते हुए टीएओ दिनेश यादव को पालिका से हटा दिया गया। शासन द्वारा 14 मई को आदेश पारित करते हुए स्थानीय निकाय निदेशायल लखनऊ में उनको शासन ने अटैच कर दिया और उन्होंने निदेशायल में ज्वाइन कर लिया था।

इसे भी पढ़ें:  शुकतीर्थ में सनातन धर्म संसदः हिंदू राष्ट्र, गौ-रक्षा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर संतों का जोर

बताया गया है कि इस आदेश के खिलाफ टीएओ ने जुलाई माह में इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे और रिट दायर की। उन्होंने शासन के अटैचमेंट के आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया है कि सेवा नियमावली में किसी अधिकारी को अटैच करने का कोई नियम नहीं है, या तो तबादला किया जाये या फिर निलंबन किया जा सकता है। इसमें उनकी ओर से अधिवक्ता संदीप कुमार ओझा, हरी प्रसाद गुप्ता, दिलीप वर्मा और मनीषा सिंह ने बहस की। शासन की ओर से सीएससी पेश हुए और शासन का पक्ष प्राप्त करने के लिए समय मांगा, लेकिन समयावधि के बाद भी शासन से जवाब हाईकोर्ट में दाखिल नहीं हुआ तो अब हाईकोर्ट ने मामले में प्रतिवादी संख्या 3 और 4 को नोटिस जारी करते हुए जवाब के साथ कोर्ट में एक सितम्बर से शुरू हो रहे सप्ताह में यानि एक से पांच सितम्बर के बीच पेश होने के लिए आदेशित किया है। प्रकरण में पालिका ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह का कहना है कि उनको हाईकोर्ट में याचिका दायर होने या कोर्ट द्वारा उनको जवाब दाखिल करने के लिए समन करने की कोई जानकारी बुधवार तक प्राप्त नहीं हुई है। कोई भी कोर्ट का आदेश नहीं मिला है उन्होंने शासन से जो शिकायत की थी, उसके आधार पर ही शासन स्तर से टीएओ दिनेश यादव को उनके गलत व्यवहार, नकारात्मक कार्यप्रणाली और आचरण के कारण ही दोषी मानकर यहां से हटाया गया है। अगर उनको कोर्ट से कोई ऐसा नोटिस मिलता है तो वो इस सम्बंध में अपना जवाब लेकर कोर्ट में पेश जरूर होंगी। 

इसे भी पढ़ें:  पुलिस हिरासत से फरारी में सिपाही और अभियुक्त को एक साल की सश्रम सजा
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *