कूड़े से कमाई की ओर बढ़ी पालिका, पहला एमआरएफ सेंटर शुरू

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् की चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप का कूड़े से कमाई का ड्रीम प्रोजेक्ट अब कागजों से निकलकर धरातल पर आ गया है। पालिका द्वारा सोमवार को कूड़े से कमाई के प्रमुख साधन मल्टी रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर का शुभारंभ कर दिया है। पहले दिन मशीनों का ट्रायल करते हुए कर्मचारियों को वेस्ट सेग्रीकेशन की ट्रेनिंग देने का काम पूरा किया गया है। इस पहले एमआरएफ सेंटर का संचालन पालिका प्रशासन ने शून्य खर्च आधारित अनुबंध पर एनजीओ को दिया है। यहां आने वाले कूड़े का पृथकीकरण करते हुए इसमें प्लास्टिक और दूसरी उपयोगी चीजों की बिक्री से होने वाली कमाई पालिका की आय बढ़ाने का काम करेगी।

चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के नेतृत्व में नगरपालिका परिषद् ने अब कूड़े को कमाई का साधन बनाने का स्वप्निल प्रयास को हकीकत में बदलने का काम कर दिखाया है। पालिका प्रशासन के द्वारा सोमवार को वार्ड 15 एकता विहार रुड़की रोड पर बनाये गये अपने पहले एमआरएफ सेंटर का शुभारंभ करते हुए इसको क्रियाशील कर दिया गया है। ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने रुड़की रोड पर बने एमआरएफ सेंटर का फीता काटकर शुभारंभ करने के साथ ही यहां पर वेस्ट सेग्रीकेशन के लिए लगाई गई विभिन्न मशीनों को मैन पावर में कूड़े के साथ परखने का काम किया गया। इस दौरान यहां पर लगाये गये कर्मचारियों को मशीनों पर कार्य करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के डीपीएम सुशील कुमार द्वारा प्रशिक्षण भी दिया गया। उन्होंने कर्मचारियों को मशीनों के संचालन और उनके कार्य व उपयोग के सम्बंध में भी विस्तृत जानकारी दी। मंगलवार से सेंटर पर पांच वार्डों से कूड़ा पहुंचाने के लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी को व्यवस्था करने के निर्देश दिये गये हैं।

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ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि कूड़े को पालिका की आय का साधन बनाने के लिए ही शासन ने एमआरएफ सेंटर स्थापित कराने का काम किया। इसी को लेकर चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के मार्गदर्शन में पालिका का पहला एमआरएफ सेंटर हमने शुरू कराया है। इसका संचालन शून्य खर्च के आधार पर एनजीओ से कराये जाने का निर्णय लिया गया है। अभी पालिका द्वारा एनजीओ महाराज श्री जी एक पहल पर्यावरण और शिक्षा की ओर के साथ अनुबंध किया गया है। इसके अध्यक्ष राहुल शर्मा और सचिव गौहर वाल्मीकि के साथ तीन माह का अनुबंध हुआ है। पालिका एनजीओ को कोई खर्च नहीं देगी, एमआरएफ सेंटर पर उसके आसपास के पांच से दस वार्डों से निकलने वाला कूड़ा सफाई कर्मियों और एमआईटूसी कंपनी के वाहनों के माध्यम से पहुंचाया जायेगा।

इस कूड़े का एनजीओ द्वारा लगाये गये छह कर्मचारी मशीनों के माध्यम से सेग्रीकेशन करेंगे और प्लास्टिक, लोहा, चमड़ा तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं को छांटने के बाद मशीनों के माध्यम से उनका प्रोसेस कर बाजार में बिक्री की जायेगी। इससे होने वाली आय में से ही पालिका एनजीओ को तय रकम रखने का अधिकार देगी, शेष रकम पालिका के कोष में आयेगी। ये अभी ट्रायल बेस पर किया गया है। तीन माह बाद इसके लिए चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के साथ वार्ता करते हुए आगामी रूपरेखा बनाई जायेगी। क्योंकि अगले एक माह में हमारे दो ओर एमआरएफ सेंटर क्रियाशील होने जा रहे हैं। इनमें से एक एकता विहार तथा दूसरा बीबीपुर में बनाया गया है, यहां मशीनों की खरीद के लिए टैण्डर हो चुका है। एक एमआरएफ सेंटर के निर्माण पर करीब 50 लाख रुपये से ज्यादा का खर्च हुआ है। ईओ ने बताया कि एनजीओ के साथ जो छह कर्मचारी लगाये गये हैं, वो रेक्टीकर्स ;कूड़ा बीनने वाले लोगद्ध हैं, शासनादेश में इन लोगों से ही कार्य करने के लिए व्यवस्था दी गई है।

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बता दें कि साल 2020 में एमआरएफ सेंटर बनाने के लिए शासन से धनराशि अवमुक्त हुई थी। इसमें सिविल वर्क के लिए 33.67 लाख और मशीनों के लिए 16.97 लाख रुपये मिले थे। इसके बाद पांच एमआरएफ सेंटर और बनाने के लिए पालिका को शासन से 2.53 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई थी। एमआरएफ सेंटर का शुभारंभ अवसर पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल कुमार, डीपीएम सुशील कुमार, चीफ सेनेट्री इंस्पेक्टर योगेश कुमार गोलियान, सेनेट्री इंस्पेक्टर पलक्षा मैनवाल, एसबीएम लिपिक रुचि शर्मा, आईटीसी मिशन सुनहरा कल से दीपक सैनी, कंप्यूटर ऑपरेटर प्रखर सिंह, एमआई2सी के प्रोजेक्ट हैड कुलदीप सिंह, अनुभव त्यागी, सहायिका चित्रा सपना, मानसी के अलावा एनजीओ सचिव गौहर वाल्मीकि आदि मौजूद रहे।

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