सलमान सईद ने बसपा को कहा अलविदा, कांग्रेस में हुए शामिल

मुजफ्फरनगर। बसपा के सिम्बल पर साल 2022 में चरथावल विधानसभा सीट से चुनाव लड़े सलमान सईद ने आखिरकार बसपा को अलविदा कहकर फिर से कांग्रेस में शामिल होकर राजनीतिक रूप से घर वापसी कर ली है। उन्होंने रायबरेली में कांग्रेस के नेता व संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाक़ात की। इसके बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय से मिलकर उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। कांग्रेसी बनने के बाद सलमान सईद ने घर आकर अपने पिता पूर्व सांसद सईदुज्जमा से मुलाकात की, उन्होंने पार्टी में वापसी पर अपने बेटे का दिल खोलकर स्वागत किया। जिले की राजनीति में यह पहला अवसर था, जबकि पिता से अलग होकर पुत्र ने दूसरे दल से चुनाव लड़ा। एक ही घर पर दो पार्टियों के झंडे नजर आने लगे थे।

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सलमान सईद ने अपना राजनितिक कैरियर कांग्रेस से ही शुरू किया था। विस चुनाव में कुछ मतभेद हुए तो उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी। अधिवक्ता सलमान सईद राष्ट्रीय खिलाड़ी होने के साथ पुरकाजी स्थित एस.एम डिग्री कॉलेज के प्रबंधक हैं। सलमान पूर्व सांसद और गृह मंत्री रहे सईदुज्जमा के पुत्र व पूर्व विधायक, सांसद और मंत्री रहे सईद मुर्तजा के पोते हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति से हुई, जहाँ उन्होंने बी.कॉम, एमएसडब्ल्यू और एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। सलमान सईद ने कांग्रेस पार्टी में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जैसे कि एनएसयूआई के वाइस प्रेसिडेंट, प्रदेश युवा कांग्रेस में उपाध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिव और महासचिव वे मेरठ, बिजनौर, और मुरादाबाद मंडल के प्रभारी भी रहे और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य के रूप में काम किया। राहुल गांधी की टीम के रूप में चित्रकूट, रायपुर, छत्तीसगढ़ आदि ट्रेनिंग कैंपों का हिस्सा रहे।

उन्होंने 2002 में पहली बार मीरापुर से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और 2016 में मुजफ्फरनगर विधानसभा के उपचुनाव में भी कांग्रेस के टिकट पर ही भाग्य आजमाया था। 2022 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर चरथावल विधानसभा से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। अब मीरापुर सीट पर हो रहे उपचुनाव के मद्देनजर उन्होंने फिर से कांग्रेस ज्वाइन की है। सलमान सईद अपने दादा और वालिद की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। इस परिवार को हमेशा एक ईमानदार और अच्छे राजनीतिक परिवार के रूप में देखा गया है, जिसकी समाज में गहरी पकड़ है। यही कारण है कि समाज के सभी वर्गों से उन्हें समर्थन मिलता है। इस परिवार की गांधी परिवार से भी नजदीकी संबंध रहे हैं।

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