भारत-अमेरिका एग्रीकल्चर ट्रेड डील किसानों के लिए ‘डेथ वारंट- राकेश टिकैत

किसान नेता का आरोप- यह डील लागू होने पर किसानों की आय, फसल के दाम और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ेगा

मुजफ्फरनगर। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित एग्रीकल्चर ट्रेड डील को लेकर किसान संगठनों में गहरी चिंता व्याप्त है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने इस समझौते को भारतीय कृषि और किसानों के भविष्य के लिए घातक बताते हुए इसके खिलाफ देशव्यापी आवाज उठाने का आह्वान किया है। संगठन का कहना है कि यह डील लागू होने पर किसानों की आय, फसल के दाम और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ेगा।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने भारतदृअमेरिका के बीच चल रही एग्रीकल्चर ट्रेड डील की चर्चाओं पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस प्रस्तावित समझौते को भारतीय किसानों का डेथ वारंट करार देते हुए कहा कि इसके लागू होने से देश के करोड़ों किसान परिवार तबाही और बर्बादी की ओर धकेल दिए जाएंगे। राकेश टिकैत ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इस डील का कड़ा विरोध जताया। उन्होंने जारी पोस्ट में कहा कि जिस तरह चीनी उत्पादों के आयात से भारतीय कंपनियों के उत्पाद घरेलू बाजार में पिछड़ते जा रहे हैं, ठीक वैसा ही हाल देश में उत्पादित कृषि उपज का होगा। सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पादों के आने से भारतीय किसानों की फसलों के दाम गिरेंगे और किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा।

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भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने अपने संदेश में कहा कि यह डील देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी पर सरकार का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार है। अमेरिका में कृषि क्षेत्र को भारी सरकारी सब्सिडी दी जाती है, जबकि भारत का किसान पहले से ही बढ़ती लागत, कर्ज और अनिश्चित बाजार से जूझ रहा है। ऐसे में अमेरिकी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करना भारतीय किसानों के लिए लगभग असंभव हो जाएगा। उन्होंने आशंका जताई कि इस समझौते से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था कमजोर होगी और सबसे अधिक नुकसान छोटे व सीमांत किसानों को झेलना पड़ेगा। यह डील आयात पर निर्भरता बढ़ाने, कॉरपोरेट नियंत्रण को मजबूत करने और किसानों की सौदेबाजी की शक्ति को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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राकेश टिकैत ने चेतावनी दी कि इसके दूरगामी परिणाम केवल किसानों की आय तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर खतरा पैदा होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों की सहमति और ठोस संरक्षण के बिना किया गया कोई भी अंतरराष्ट्रीय समझौता किसान हित में नहीं हो सकता। भाकियू ने इस डील के खिलाफ किसानों से एकजुट होकर आवाज बुलंद करने की अपील की है और संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज किया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।

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