तीन दशक से अधिक समय से कांवड़ियों की सेवा में जुटी क्रांतिसेना, सेवा करने वालों को दिए प्रशस्ति पत्र
मुजफ्फरनगर। आस्था, सेवा और समर्पण की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए क्रांतिसेना की ओर से आयोजित 33वें कांवड़ सेवा शिविर का मंगलवार को विधिवत समापन हो गया। आनंद भवन स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित शिविर में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। समापन अवसर पर शिविर में सेवा करने वाले कार्यकर्ताओं और सहयोगियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
क्रांतिसेना के अध्यक्ष ललित मोहन शर्मा ने बताया कि संगठन की ओर से इस वर्ष 33वां कांवड़ सेवा शिविर आयोजित किया गया। पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से संगठन सावन मास में शिवरात्रि के अवसर पर हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौटने वाले शिवभक्तों की सेवा करता आ रहा है। इसी परंपरा के तहत इस बार भी आनंद भवन स्थित शिव मंदिर परिसर में कांवड़ियों के लिए सेवा शिविर लगाया गया। शिविर के दौरान कांवड़ लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए संगठन के कार्यकर्ता लगातार सेवा कार्यों में जुटे रहे। कांवड़ियों के विश्राम और अन्य सुविधाओं के लिए कार्यकर्ताओं ने जिम्मेदारियां संभालीं। सेवा शिविर में संगठन से जुड़े पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ अन्य लोगों ने भी सहयोग किया।

समापन कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों ने क्रांतिसेना के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा करना सामाजिक और धार्मिक समर्पण का प्रतीक है। लगातार 33 वर्षों से सेवा शिविर का आयोजन किया जाना संगठन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस अवसर पर शिविर में सेवा देने वाले कार्यकर्ताओं और सहयोगियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके योगदान को सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले कार्यकर्ताओं ने भविष्य में भी कांवड़ यात्रा के दौरान इसी तरह सेवा कार्य जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया। क्रांतिसेना के अध्यक्ष ललित मोहन शर्मा ने सभी कार्यकर्ताओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि कांवड़ सेवा शिविर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा और श्रद्धा की उस परंपरा का हिस्सा है, जिसके माध्यम से संगठन प्रत्येक वर्ष शिवभक्तों के बीच अपनी सहभागिता दर्ज कराता है।
