बिल्डिंग की चौथी मंजिल से पाइप व तार के सहारे उतरी लवप्रीत ने तीसरे मंजिल से लगाई छलांग, पैर टूटा पर बच गई जान
मुजफ्फरनगर। लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र के पुरनिया में स्थित हेक्सार स्टूडियो एनीमेशन एंड गेमिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड में जहां 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, वहीं मुजफ्फरनगर जनपद की मूल निवासी युवती लवप्रीत कौर ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए मौत को मात दे दी। बिल्डिंग की ऊपरी मंजिल पर फंसी लवप्रीत ने धुएं और आग की लपटों के बीच तार और पाइप का सहारा लेकर नीचे उतरने का प्रयास किया और बीच रास्ते से छलांग लगा दी। इस दौरान उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया, लेकिन उनकी जान बच गई।
शहर के मौहल्ला देवपुरम निवासी लवप्रीत कौर के पिता गुलशन सिंह सन्नी के अनुसार वह मूल रूप से मुजफ्फरनगर की रहने वाली हैं। विदेश में पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारत लौटी थीं और करीब पांच माह पूर्व ही लखनऊ स्थित हेक्सार स्टूडियो में नौकरी शुरू की थी। वह कंपनी में केयूसी के पद पर कार्यरत बताई गई है। मुजफ्फरनगर से कुछ माह पहले ही लवप्रीत का परिवार दिल्ली स्थानांतरित हुआ था, जबकि लवप्रीत नौकरी के कारण करीब पांच माह से लखनऊ में रह रही थीं।
हादसे की चश्मदीद लवप्रीत ने बताया कि घटना वाले दिन कंपनी में एक सहकर्मी का जन्मदिन मनाया जा रहा था। कार्यालय में सामान्य माहौल था और सभी कर्मचारी अपने काम में व्यस्त थे। दोपहर करीब दो बजे लंच के बाद जैसे ही कर्मचारी अपने-अपने कार्यस्थल पर पहुंचे, नीचे से कुछ जलने की गंध के साथ तेज शोर की आवाज आने लगी। कुछ ही देर में धुएं का गुबार पूरे भवन में फैल गया और आग की लपटें तेजी से ऊपर की ओर बढ़ने लगीं।

लवप्रीत के अनुसार उस समय तीसरी और चौथी मंजिल पर 25 से 30 कर्मचारी मौजूद थे। आग इतनी तेजी से फैली कि बाहर निकलने के सभी रास्ते बंद हो गए। चारों तरफ धुआं भर गया और सांस लेना मुश्किल हो गया। ऊपर और नीचे दोनों ओर मौत दिखाई दे रही थी। ऐसे में जान बचाने के लिए कर्मचारियों ने खिड़कियों के शीशे तोड़े और बाहर निकलने का रास्ता तलाशने लगे। वो चौथी मंजिल पर फंसी थी।
उन्होंने बताया कि वह और कुछ अन्य साथी तार और पाइप के सहारे नीचे उतरने लगे। स्थिति लगातार भयावह होती जा रही थी। धुएं और आग के बीच ज्यादा देर रुकना संभव नहीं था। इसी दौरान वह भी पाइप और तार के सहारे नीचे उतरने लगी, लेकिन हिम्मत टूटने लगी, उन्होंने नीचे कूदने का फैसला किया। छलांग लगाने से उनके पैर में गंभीर चोट आई, लेकिन वह सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहीं। कई अन्य साथियों को यह अवसर नहीं मिल सका। लवप्रीत ने बताया कि हादसे के दौरान हर व्यक्ति अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था। कुछ साथी मदद के लिए पुकार रहे थे तो कुछ बाहर निकलने का रास्ता खोज रहे थे। आग की भयावहता इतनी थी कि देखते ही देखते खुशियों का माहौल चीख-पुकार और मातम में बदल गया। इस हादसे में अपने कई सहकर्मियों को खोने का दुख उन्हें लगातार परेशान कर रहा है।
घटना के बाद घायल लवप्रीत को तत्काल किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक समय में उनके परिवार का कोई सदस्य अस्पताल में मौजूद नहीं था। उनके एक मित्र ने अस्पताल में उनकी देखभाल की। देर रात घटना की सूचना मिलने पर उनके पिता गुलशन सिंह सन्नी परिजनों के साथ दिल्ली से लखनऊ पहुंचे। परिजनों ने बताया कि लवप्रीत फिलहाल उपचाराधीन हैं और उनकी हालत पहले से बेहतर है। चूंकि वह इस दर्दनाक हादसे की प्रत्यक्षदर्शी हैं, इसलिए मीडिया और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी उनसे मुलाकात कर घटना की जानकारी ले रहे हैं।






