सहारनपुर। बुद्ध विहार स्थित अंबेडकर भवन में हुई सभा में भंते विनयाचार्य ने कहा कि बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार विश्वभर के बौद्धों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।उन्होंने 1949 के बिहार एक्ट में गठित मंदिर प्रबंधन समिति में गैर-बौद्ध सदस्यों की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कानून में बदलाव की मांग की। 13 सितंबर 2026 से उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में जागरूकता यात्रा निकाली जाएगी।
भंते विनयाचार्य ने बताया कि महाबोधि महाविहार की प्रबंधन व्यवस्था पूरी तरह बौद्ध समाज को सौंपने और नया कानून बनाने की मांग को लेकर यह आंदोलन चल रहा है। आंदोलन से जुड़े पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि महाविहार से प्राप्त दान की राशि का बौद्ध समाज के हित में पर्याप्त उपयोग नहीं किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि इस आंदोलन के तहत 12 फरवरी 2025 से बोधगया में एक अभियान शुरू किया गया था। इसके बाद देश के विभिन्न राज्यों में जनजागरूकता यात्राएं निकाली गईं। 12 फरवरी 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन किया गया था। अब अभियान को उत्तर प्रदेश में विस्तार देने की तैयारी है। भंते विनयाचार्य ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्तरीय जागरूकता यात्रा 13 सितंबर 2026 को सहारनपुर से शुरू होगी। यह यात्रा अंबेडकर भवन,रामनगर से चलकर बामियान बुद्ध विहार पहुंचेगी,जहां जनसंवाद और सभा का आयोजन होगा। इसके बाद यात्रा प्रदेश के सभी 75 जिलों में जाकर लोगों को महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन से जोड़ने का प्रयास करेगी। भीम आर्मी जय भीम संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह नौटियाल ने इस दौरान कहा कि जब मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों के प्रमुख धार्मिक स्थलों की व्यवस्था उनके धार्मिक समुदायों के हाथ में है,तो बौद्धों के प्रमुख धार्मिक स्थल महाबोधि महाविहार की व्यवस्था भी बौद्ध समाज को मिलनी चाहिए।
