फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाया फैसला, एक लाख का जुर्माना भी लगा, जज रवि दिवाकर ने मृतका के मृत्युकालिक बयान को बनाया दोषसिद्धि का आधार
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में शाहपुर के चर्चित शहजादी हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने सोमवार को पति नदीम को हत्या का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले में दहेज हत्या का आरोप साबित नहीं हुआ, लेकिन मृतका के मृत्युकालिक बयान के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत नदीम को दोषी माना गया।
अदालत ने कहा कि मृत्यु के करीब पहुंचकर बोले गए शब्द किसी स्वार्थ, लाभ या भविष्य की अपेक्षा से नहीं, बल्कि बीती हुई घटना की अंतिम स्मृति से निकलते हैं। न्यायालय ने माना कि मृत्युकालिक कथन न्यायिक विवेक की कसौटी पर खरा उतरता है और उसमें सत्यता व विश्वसनीयता का पर्याप्त आश्वासन हो तो अकेले उसी के आधार पर दोषसिद्धि हो सकती है। मामले की सुनवाई के दौरान मृतका के पिता और वादी दिलशाद, उसकी मां और सगा भाई शाहरुख खान अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। उन्होंने अदालत में अभियुक्तों के पक्ष में गवाही दी। वादी ने कहा कि शहजादी की शादी बिना दहेज के हुई थी और ससुराल वालों ने उसे कभी प्रताड़ित नहीं किया। इसके बावजूद अदालत ने शहजादी के मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज मृत्युकालिक बयान को अहम साक्ष्य माना।
एडीजीसी कुलदीप कुमार के अनुसार 24 जुलाई 2018 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के बर्न विभाग में भर्ती शहजादी का बयान तत्कालीन कार्यपालक मजिस्ट्रेट अशोक कुमार ने दर्ज किया था। शहजादी ने अपने बयान में बताया था कि शादी के करीब एक साल बाद उसका पति शराब पीकर उसके साथ मारपीट करने लगा था। वह गाली देता था और तलाक की धमकी देता था। उसके अनुसार 23 जुलाई 2018 की शाम नदीम शराब पीकर घर आया और उसके साथ मारपीट की। खाना खाने के बाद दोबारा मारपीट की और तलाक देने की बात कही। रात करीब 8.30 बजे उसके ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी।
दर्ज मुकदमे के अनुसार बागपत के गांव निवाड़ा निवासी दिलशाद पुस असलूब ने अपनी बेटी शहजादी का निकाह 10 जनवरी 2015 को शाहपुर निवासी नदीम पुत्र सलीम के साथ किया था। 23 जुलाई 2018 की रात शहजादी के साथ मारपीट कर उसके ऊपर केरोसिन डालकर आग लगाने का आरोप था। झुलसी शहजादी को पहले बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज और फिर आनंद हॉस्पिटल मेरठ ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 28 जुलाई 2018 को उसकी मौत हो गई। उसका शरीर करीब 98 प्रतिशत तक जला हुआ था और मौत का कारण सेप्टिक शॉक पाया गया।
अभियोजन के अनुसार प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि शादी के बाद कम दहेज लाने को लेकर शहजादी को प्रताड़ित किया जाता था और एक मोटरसाइकिल व एक लाख रुपये नकद की मांग की जाती थी। मामले में पति नदीम, सास शमशीदा और ननद सोनी को नामजद किया गया था। सास की ट्रायल के दौरान मौत हो गई, जबकि ननद सोनी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। अदालत ने माना कि शहजादी के अंतिम बयान में अतिरिक्त दहेज की मांग या दहेज के लिए क्रूरता की बात नहीं थी। इसलिए धारा 304बी और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 का अपराध साबित नहीं हुआ। हालांकि, अदालत ने माना कि नदीम ने जान से मारने की नीयत से शहजादी पर केरोसिन डालकर आग लगाई थी। इसी आधार पर उसे धारा 302 में दोषी ठहराया गया था और सोमवार को फांसी की सजा सुनाई है।
