सिविल लाइन्स पुलिस ने माल रोड पर देर रात चेकिंग के दौरान बलेनो कार से 72 हजार नशीले कैप्सूल व 549 इंजेक्शन किए जब्त
मुजफ्फरनगर। जनपद में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार और तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना सिविल लाइन्स पुलिस को एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। पुलिस टीम ने मंगलवार की देर रात माल रोड पर घेराबंदी कर एक बिना नंबर प्लेट की संदिग्ध बलेनो कार से 72 हजार प्रतिबंधित ट्रामाडोल नशीले कैप्सूल (भूरे व नीले) और 549 नशीले (एविल व पैंटासिल) इंजेक्शन बरामद किए हैं। बरामद दवाओं का कुल वजन 42.91 किलोग्राम से अधिक है। मौके से तीन शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तस्करी में इस्तेमाल कार को धारा 207 एमवी एक्ट में सीज कर दिया गया है।
इस मामले में उप निरीक्षक अरूण चाहर ने थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। थाना सिविल लाइन प्रभारी के अनुसार, उपनिरीक्षक अरुण चाहर पुलिस टीम के साथ रेलवे रोड पर संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। उसी दौरान एसडी तिराहे की ओर से आ रही बिना नंबर प्लेट की सफेद रंग की बलेनो कार को जब टॉर्च की रोशनी दिखाकर रोकने का प्रयास किया गया, तो चालक गाड़ी की रफ्तार तेज कर माल रोड की तरफ भगाने लगा। पुलिस टीम ने अपने निजी वाहन से पीछा कर माल रोड वाले रास्ते पर कार को घेरकर रोक लिया।
कार की पिछली सीट और डिग्गी में तीन कार्टून और एक बैग रखा हुआ था। पूछताछ में कार सवारों ने बताया कि इसमें नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले स्पास्मोविल कम्पनी के ट्रामाडोल कैप्सूल और इंजेक्शन हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उपनिरीक्षक अरुण चाहर ने सीओ सिटी एएसपी सिद्धार्थ के. मिश्रा को मौके पर बुलाया। राजपत्रित अधिकारी की उपस्थिति में जब तलाशी ली गई तो 2 कार्टूनों में 47,976 भूरे रंग के कैप्सूल (28.78 किग्रा), 1 कार्टून में 23,976 नीले रंग के कैप्सूल (14.13 किग्रा) तथा बैग से 50 एविल व 499 पैंटासिल इंजेक्शन बरामद हुए।
पुलिस ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों की पहचान दीपक पुत्र रोहताश (निवासी खतौली मुजफ्फरनगर), कलीम पुत्र अशफाक (निवासी खरखौदा, मेरठ) और जुनैद पुत्र इकबाल (निवासी लोहिया नगर, मेरठ) के रूप में हुई है। आरोपियों ने खुलासा किया कि वे दवाओं के क्षेत्र में काम करते हैं और हापुड़ निवासी नवाब से व्हाट्सएप के जरिए संपर्क में थे। वे नवाब से ब्लैक में नशीली दवाएं खरीदकर लाते थे और बिना डॉक्टर के पर्चे के नशे के आदी युवाओं को महंगे दामों पर बेचते थे।
