ऑपरेशन सिंदूर जासूसी मामला: सबूतों पर उठे सवाल, मिली राहत

ऑपरेशन सिंदूर जासूसी मामला में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोपी देवेंद्र सिंह को जमानत दे दी है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसे ठोस सबूत पेश नहीं किए गए, जिनसे यह साबित हो कि सेना से जुड़ी सामग्री वास्तव में पाकिस्तान के साथ साझा की गई थी। यह मामला मई 2025 का बताया गया है। आरोप था कि देवेंद्र सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की गतिविधियों और संवेदनशील सूचनाओं को पाकिस्तान तक पहुंचाया।

मामले की सुनवाई जस्टिस विनोद एस भारद्वाज कर रहे थे। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी पाया कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत आवश्यक मंजूरी नहीं मिली थी। इसी वजह से मुकदमे की कार्यवाही पूरी नहीं हो पा रही थी। अदालत ने राज्य पक्ष से पूछा कि क्या ऐसा कोई वीडियो मिला है, जो सेना से संबंधित हो और जिसे पाकिस्तान में किसी व्यक्ति को भेजा गया हो। सुनवाई के दौरान इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा सका। इसके बाद अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी।

कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि शस्त्र अधिनियम के मामले को छोड़कर देवेंद्र सिंह का कोई दूसरा आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया है। देवेंद्र सिंह पहली बार पुलिस की रडार पर शस्त्र अधिनियम के मामले में आया था। पुलिस ने उसके खिलाफ कथित तौर पर फेसबुक पर पिस्टल और गन के साथ तस्वीरें अपलोड करने के आरोप में कार्रवाई की थी। जांच के दौरान पुलिस ने उसका फोन जब्त कर लिया था। बाद में उसे शस्त्र अधिनियम के मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन इसके कुछ समय बाद उस पर एक और गंभीर मामला दर्ज हुआ।

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देवेंद्र सिंह के खिलाफ 15 मई 2025 को दूसरी एफआईआर दर्ज की गई थी। यह मामला पूछताछ के दौरान दिए गए बयान के आधार पर दर्ज हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, इन्हीं बयानों में पाकिस्तान के कुछ लोगों के साथ उसके कथित संबंधों की बात सामने आई थी। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने जासूसी के आरोपों की दिशा में मामला आगे बढ़ाया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि देवेंद्र सिंह नवंबर 2024 में कारतारपुर साहिब और नानकाना साहिब तीर्थयात्रा पर गया था।

आरोप है कि उसी दौरान वह कुछ लोगों के संपर्क में आया। रिपोर्ट के अनुसार, इन लोगों की पहचान शाह जी, राशिद मोहम्मद, अर्सलान और रिजा नाम की एक महिला के रूप में हुई। जांच एजेंसियों को संदेह था कि ये सभी जासूसी गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं। अभियोजन का दावा था कि भारत लौटने के बाद भी देवेंद्र सिंह, शाह जी नाम के व्यक्ति के संपर्क में बना रहा। यह भी आरोप लगाया गया कि उसने भारतीय सेना की गतिविधियों और संवेदनशील जानकारी को रिकॉर्ड किया था।

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अभियोजन पक्ष के अनुसार, देवेंद्र सिंह के फोन से सेना के वाहनों का वीडियो मिला था। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया कि गिरफ्तारी के डर से उसने कुछ वीडियो हटा दिए थे। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने यह संदेह जताया कि उसके पास मौजूद सामग्री संवेदनशील प्रकृति की हो सकती है। हालांकि अदालत में यह दिखाने वाला ठोस रिकॉर्ड पेश नहीं किया जा सका कि यह सामग्री पाकिस्तान भेजी गई थी। देवेंद्र सिंह की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि कथित कॉल 18 अप्रैल से 10 मई के बीच हुए थे।

बचाव पक्ष का कहना था कि ऑपरेशन सिंदूर 9 मई 2025 को पूरा हो गया था। वकील ने दलील दी कि ऑपरेशन शुरू होने के बाद बातचीत के कोई ठोस आरोप नहीं हैं। इसी आधार पर बचाव पक्ष ने कहा कि जासूसी का आरोप उपलब्ध सामग्री से सीधे तौर पर साबित नहीं होता। मामले में यह भी कहा गया कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था। इसी अभियान के दौरान सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी लीक होने का आरोप लगाया गया था। हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल आरोप पर्याप्त नहीं हैं।

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अदालत के सामने यह दिखाया जाना जरूरी है कि कथित सामग्री वास्तव में साझा भी की गई थी। इस पूरे मामले में अदालत के सामने दो बातें अहम रहीं। पहली, पाकिस्तान को जानकारी भेजे जाने का प्रत्यक्ष और ठोस सबूत नहीं दिखाया जा सका। दूसरी, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मंजूरी लंबित रहने से ट्रायल आगे नहीं बढ़ पा रहा था। इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने देवेंद्र सिंह को जमानत दे दी। फिलहाल मामला अपने आरोपों और जांच की दिशा को लेकर कानूनी प्रक्रिया में बना हुआ है।

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