श्री शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस पर सती प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन

मुजफ्फरनगर। रामलीला टीला मैदान में चल रही भव्य श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिवस की कथा में श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का संगम देखने को मिला। कथा व्यास गंगोत्री तिवारी मृदुल महाराज ने सती प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी का रिश्ता दूध और पानी की तरह पवित्र और एकाकार होता है, परंतु यदि इनके बीच संशय रूपी खटाई पड़ जाए तो यह संबंध टूट सकते हैं।

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उन्होंने भगवान शिव और सती के प्रसंग को विस्तार से बताते हुए कहा कि जब सती ने भगवान राम की परीक्षा लेने की जिद की और परीक्षा लेने के बाद लौटकर भगवान शिव से झूठ कहा कि उन्होंने कोई परीक्षा नहीं ली, तब भगवान शिव मन ही मन सती से रुष्ट हो गए और अंततः उनका परित्याग कर दिया।

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व्यास जी ने आगे कहा कि यही सती अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लेती हैं और कठोर तपस्या के पश्चात भगवान शिव उन्हें अपनी अर्धांगिनी रूप में स्वीकार करते हैं। कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह का भावमय वर्णन कर व्यास जी ने समस्त श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु बार-बार ‘हर हर महादेव’ के जयकारे लगाकर वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे।

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इस अवसर पर मांगेराम, राजाराम शर्मा, चांदनी वर्मा, सुमन बंसल, गौरव शर्मा, रविंद्र सैनी, हेमराज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहें। कथा स्थल पर अनुशासन और व्यवस्था की सराहनीय व्यवस्था देखी गई। श्रद्धालु प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण का लाभ ले रहे है।

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