जयंत से नाराज पूर्व सांसद अमीर आलम ने बेट नवाजिश के साथ थामा चन्द्रशेखर का हाथ

शामली। पूर्व सांसद अमीर आलम खां ने रविवार को एक बार फिर सियासी चौला बदलते हुए केन्द्रीय मंत्री और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी से नाराजगी को जग-जाहिर करते हुए अपने पैतृक कस्बे गढ़ीपुख्ता में समर्थकों के भारी जनसैलाब के साथ आसपा मुखिया सांसद चन्द्रशेखर आजाद का हाथ थामकर नयी सियासी हलचल पैदा कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने भविष्य में जनपद में दलित मुस्लिम के बेजोड़ सियासी समीकरण को मजबूत बनाने की पहल की।

पूर्व सांसद अमीर आलम का परिवार चार दशक से सियासत में सक्रिय है। उनके बेटे ने पूर्व विधायक नवाजिश आलम ने साल 2017 में बसपा से मीरापुर विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार मिली। पिता-पुत्र 2018 में रालोद में शामिल हो गए थे। उनके दलबदल को पश्चिम यूपी में साल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उठापटक के दौर का शुभारंभ माना जा रहा है। पिछले आठ साल से रालोद का हिस्सा रहे पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान रविवार को हजारों समर्थकों के साथ जयंत को छोड़कर आसपा में शामिल हो गये। उन्होंने गढ़ीपुख्ता में जनसभा के दौरान आसपा की सदस्यता ग्रहण की। इसमें मुख्य अतिथि चन्द्रशेखर आजाद रहे।

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मूल रूप से गढ़ीपुख्ता के रहने वाले पूर्व सांसद अमीर आलम का परिवार पिछले चार दशक से सियासत में सक्रिय है। पूर्व विधायक नवाजिश आलम ने साल 2017 में बसपा के टिकट पर मीरापुर विधानसभा से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार मिली। पिता-पुत्र ने 2018 में रालोद का दामन थाम लिया। साल 2019 के लोकसभा, 2022 के विधानसभा और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर और शामली की अलग-अलग सीटों से टिकट के लिए दावा भी किया, लेकिन रालोद ने चुनाव नहीं लड़ाया। पूर्व सांसद ने कई बार सार्वजनिक तौर पर टिकट नहीं दिए जाने पर नाराजगी भी जताई। मीरापुर विधानसभा के उपचुनाव में भी पूर्व विधायक को टिकट दिए जाने का दावा किया, लेकिन एन वक्त पर भाजपा की मिथलेश पाल को रालोद का टिकट मिला और जीत हासिल हुई। आलम परिवार मीरापुर के चुनाव प्रचार में भी नजर नहीं आया था। पूर्व सांसद अमीर आलम खान वर्ष 1985 में थानाभवन से विधायक चुने गए थे। जनता दल के टिकट पर 1989 में मोरना और 1996 में थानाभवन से तीसरी बार विधायक बने। कैराना लोकसभा सीट से 1999 में भाजपा नेता और उपथल सेना अध्यक्ष निरंजन सिंह मलिक को हराकर चुनाव जीता था। एक बार वह राज्यसभा सदस्य भी रहे। पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान ने कहा कि लगातार आठ साल रालोद में रहे। टिकट का दावा किया, लेकिन बात नहीं बनी। अगर मुझे विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ाया जा सकता था तो लोकसभा का चुनाव पिता अमीर आलम को लड़ाया जाना चाहिए था। चन्द्रशेखर आजाद ने जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि अमीर आलम और उनके पुत्र नवाजिश के पार्टी में आने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हमारा दल और मजबूत होगा और दलित मुस्लिमों के हितों के लिए संघर्ष को नई ताकत मिलेगी। 

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