आईआईए मुजफ्फरनगर में पोश एक्ट अनुपालन पर मंथन, इंटरनल कमेटी गठन पर बनी सहमति

सहायक श्रमायुक्त दिवेश सिंह ने कहा कि पोश एक्ट उद्योगों के लिए एक सकारात्मक और संरक्षण प्रदान करने वाला कानून है, समाधान संस्था के भीतर ही संभव

मुजफ्फरनगर। इंडियन इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन (आईआईए) मुजफ्फरनगर चैप्टर की ओर से कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम (पोश एक्ट), 2013 के प्रभावी अनुपालन को लेकर होटल स्वर्ण इन एंड सुइट्स में एक महत्वपूर्ण ब्रेकफास्ट मीटिंग का आयोजन किया गया। बैठक में उद्योगों में पोश एक्ट के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इंटरनल कमेटी के गठन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए आईआईए मुजफ्फरनगर चैप्टर के चेयरमैन अमित जैन ने कहा कि पोश एक्ट को केवल कानूनी औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि सुरक्षित, सम्मानजनक और संवेदनशील कार्यसंस्कृति के रूप में अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल की परिभाषा अत्यंत व्यापक है, जिसमें कार्यालय, फैक्ट्री के साथ-साथ अन्य सभी संबंधित स्थान शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सरकार की मंशा के अनुरूप प्रत्येक नियोक्ता की यह वैधानिक जिम्मेदारी है कि वह महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करे। जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां महिला कर्मचारी की उपलब्धता की परवाह किए बिना इंटरनल कमेटी का गठन अनिवार्य है।

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कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार ने पोश एक्ट की विस्तृत जानकारी देते हुए अधिनियम से जुड़े कई भ्रमों को दूर किया। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल की परिभाषा में कार्यालय, फैक्ट्री, नर्सिंग होम, बैंक, मनरेगा कार्यस्थल, कार्य से संबंधित यात्रा और घरेलू कार्यस्थल तक शामिल हैं। उन्होंने इंटरनल कमेटी के गठन, उसका डिस्प्ले, समिति का विवरण सी-बॉक्स पोर्टल पर अपलोड करने, वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि जहां 10 से कम कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां शिकायत लोकल कमेटी के माध्यम से की जा सकती है। नियोक्ता या पीठासीन अधिकारी के विरुद्ध शिकायत की स्थिति में भी लोकल कमेटी ही सक्षम प्राधिकारी होती है। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पोश एक्ट के अनुपालन की नियमित निगरानी की जा रही है।

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सहायक श्रमायुक्त दिवेश सिंह ने कहा कि पोश एक्ट उद्योगों के लिए एक सकारात्मक और संरक्षण प्रदान करने वाला कानून है। इंटरनल कमेटी के प्रभावी गठन से शिकायतों का निष्पक्ष, गोपनीय और समयबद्ध समाधान संस्था के भीतर ही संभव हो जाता है, जिससे महिलाओं में सुरक्षा की भावना बढ़ती है और उद्योग अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से बचते हैं। सहायक आयुक्त उद्योग आशीष कुमार ने इंटरनल कमेटी के गठन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पीठासीन अधिकारी का वरिष्ठ महिला कर्मचारी होना अनिवार्य है। महिला कर्मचारी उपलब्ध न होने की स्थिति में अधिनियम में वैकल्पिक प्रावधान भी दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियोक्ता या पीठासीन अधिकारी के विरुद्ध शिकायत सीधे लोकल कमेटी में की जा सकती है।
आईआईए के डिवीजनल सेक्रेटरी पवन कुमार गोयल ने आगामी 31 जनवरी को विक्टोरिया पार्क, मेरठ में आयोजित आईआईए मुजफ्फरनगर चौप्टर और आईआईए मेरठ चौप्टर के बीच मैत्री क्रिकेट मैच में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर टीम का उत्साहवर्धन करने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन आईआईए सचिव राहुल मित्तल ने किया। बैठक के अंत में आईआईए कोषाध्यक्ष सुधीर अग्रवाल ने सभी अतिथियों और उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
बैठक में आईआईए के पूर्व चेयरमैन विपुल भटनागर, फेडरेशन सचिव अभिषेक अग्रवाल सहित अनमोल अग्रवाल, रविंद्र सिंघल, राज शाह, तुषार गुप्ता (अधिवक्ता), राकेश जैन, अशोक शाह, एफ.सी. मोघा, शमित अग्रवाल, मुकुल गोयल, डॉ. यशपाल सिंह, सुशील अग्रवाल, अनुज कुचछल, प्राचीर अरोरा, अजय अरोरा, नमन जैन, सौरभ मित्तल, राकेश ढींगरा, आचमन गोयल, अनन्या गोयल, कशिश अरोरा, राहुल कसाना, मनोज गुप्ता, मुदित जैन, सुनील चौधरी, पुलकित सिंगल, सचिन शर्मा, रविंद्र कुमार जैन, रजनीश कुमार, सूरज तनेजा, प्रणव सिंगल, अनूप भाटिया, अंकुर मित्तल, भारत भूषण सहित बड़ी संख्या में आईआईए सदस्य उपस्थित रहे।

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