गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में पुलिस विभाग की साख एक बार फिर सवालों में आ गई है। जिले में रिश्वतखोरी के मामलों पर विजिलेंस की सख्ती लगातार देखने को मिल रही है। बीते तीन महीनों के भीतर विजिलेंस टीम ने तीसरी बड़ी कार्रवाई करते हुए निवाड़ी थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) जयपाल सिंह रावत को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
इससे पहले भी गाजियाबाद में दो महिला दरोगाओं को रिश्वत के आरोप में पकड़ा जा चुका है, जिससे साफ है कि भ्रष्टाचार पर निगरानी एजेंसियों की नजर अब और तेज हो गई है।
मामला निवाड़ी थाना क्षेत्र के अबूपुर गांव से जुड़ा है। गांव के पूर्व प्रधान राकेश कुमार उर्फ बिट्टू ने बताया कि उनके खिलाफ 2 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर अभद्र टिप्पणी करने का झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया गया। राकेश का कहना है कि न तो उन्होंने कोई आपत्तिजनक पोस्ट की थी और न ही किसी सोशल मीडिया ग्रुप में ऐसा कुछ लिखा था। उनके मुताबिक यह पूरा विवाद गांव की पुरानी चुनावी रंजिश का नतीजा था।
पूर्व प्रधान ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी जयपाल रावत ने उन्हें धमकाते हुए साफ कहा था कि अगर 50 हजार रुपये नहीं दिए गए तो जेल भेज दिया जाएगा। न्याय की उम्मीद में राकेश एक महीने तक एसीपी मोदीनगर से लेकर डीसीपी देहात तक अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन कहीं से कोई राहत नहीं मिली।
इस बीच पुलिस दबाव बढ़ता गया। राकेश का कहना है कि इंस्पेक्टर ने उनके घर पर कई बार दबिश दी, जिससे न सिर्फ उन्हें बल्कि पूरे परिवार को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
आखिरकार परेशान होकर राकेश ने मेरठ विजिलेंस इकाई का रुख किया। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस टीम ने पूरी योजना बनाई। तय रणनीति के तहत बुधवार को थाने में इंस्पेक्टर के कार्यालय में जैसे ही 50 हजार रुपये दिए गए, पहले से तैनात विजिलेंस टीम ने तुरंत छापा मारकर एसएचओ जयपाल सिंह रावत को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
फिलहाल आरोपी पुलिस अधिकारी से पूछताछ जारी है और विजिलेंस की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस गिरफ्तारी के बाद जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।






