जाति और नशे के जहर से नस्ल को बचाना जरूरीः चंद्रमोहन

हिन्द मजदूर किसान समिति ने किया मजदूर-किसान महासभा का आयोजन, राष्ट्रीय अध्यक्ष बोले-फसल से पहले नस्ल बचाओ

मुजफ्फरनगर। रविवार को पंजाबी बारात घर भोपा रोड मुजफ्फरनगर में हिन्द मजदूर किसान समिति ने फसल से पहले नस्ल बचाने के प्रति जागरूकता के लिए मजदूर किसानों की एक महासभा का आयोजन किया, जिसमें आस पास क्षेत्र से हिन्द मजदूर किसान समिति के हजारों सहयोगी सम्मिलित हुए।

इस मजदूर और किसान महासभा को संबोधित करते हुए हिन्द मजदूर किसान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रान्तिगुरु चन्द्रमोहन महाराज ने कहा कि फसल से ज्यादा कीमती नस्ल है, क्योंकि अच्छी फसल और उसकी कीमत को तो हम फिर ले सकते हैं, लेकिन अगर एक बार नस्ल बर्बाद हो गयी तो उसे ठीक करना बहुत कठिन है। हमारी नस्ल को खतरा नशे के जहर और जाति के कहर से है, क्योंकि नशे का जहर हमारा नाश करता है और जाति का कहर हमारा सत्यानाश करता है।

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ऐसे कितने ही परिवार हैं जिनकी नस्ल के नशे में लगने से जिनकी जमीन तक भी बिक चुकी है और वे परिवार के परिवार बर्बाद हो चुके हैं और जब जमीन ही नहीं रहेगी तो किसान खेती कहां करेंगे ? इसलिए नस्ल को बचाना बहुत ही जरूरी है। नशे और जाति से हम मजदूर किसानों का कोई लाभ नहीं होता उल्टा हमारी नस्ल बर्बादी की तरफ बढती है। भृष्ट नेता हमें और हमारी नस्ल को धर्म से हटाता है, नशे और जाति के जहर में लगाता है। ये भृष्ट नेता की पहचान है। हमें जागरूक होना पड़ेगा कि जो भी नेता नशा और जाति का जहर फैलाने का प्रयास करता है उसका हम पूरी तरह बहिष्कार करें क्योंकि वो हमारी नस्ल का दुश्मन है। उन्होंने कहा कि भृष्ट नेता नशे और जाति का जहर फैलाकर स्वयं अमीर, अमीर, अमीर होता रहता है और मजदूर किसान ज्यों का त्यों रहता है। इनका तो यही उद्देश्य है कि मजदूर किसानों को नशे में डूबाओ, जाति के जाल में फसाओ और धर्म से हटाओ।

क्रान्तिगुरु चन्द्रमोहन ने अपने संबोधन में कहा कि मनुस्मृति जन्म से किसी को ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य नहीं मानती। मनुस्मृति संसार का पहला संविधान है जन्मजात जाति मानने वाले ही मनुस्मृति का विरोध करते हैं। इस अवसर पर क्रान्तिगुरु चन्द्रमोहन ने जाति व्यवस्था और नशे से मुक्ति के लिए हजारों युवाओं को जनेऊँ धारण कराया और शपथ दिलाई कि वे नशे के जहर और जाति के कहर से बचेंगे और बचाएंगे और देश में पढ़ाई दवाई एक समान फ्री कराने के लिए जागरूकता फैलायेंगे। अगर हम अपनी नस्ल के प्रति गहराई से जागरूक हो गए और अपनी नस्ल को हमने मजबूत कर लिया तो स्थानीय मुद्दे भी पक्का सफल होंगे चाहे वो आवारा पशुओं का मुद्दा हो, फसल की उचित कीमत का मुद्दा हो, बिजली का मुद्दा हो या जनसँख्या नियंत्रण का मुद्दा हो इत्यादि। इस अवसर पर ओमप्रकाश, कुलदीप, विकास, राजपाल, दीपक, पंकज, अमित, नवीन, रविकांत, कुशल, तपेंद्र, प्रवीण, विनोद, इत्यादि का सहयोग रहा।

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