अदालत ने फैसले में की टिप्पणी, लाश नहीं तो केस नहीं की विचारधारा बनाना बेहद गलत
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर के बहुचर्चित राजेंद्र सैनी हत्याकांड में आठ वर्ष बाद न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले को विरल से विरलतम श्रेणी का अपराध मानते हुए कहा कि आरोपियों ने हत्या के बाद शव को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश की, लेकिन सत्य को अधिक समय तक छिपाया नहीं जा सकता। न्यायालय की टिप्पणी और फैसले ने इस चर्चित मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
जनपद के चर्चित राजेंद्र सैनी हत्याकांड में आठ साल बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं त्वरित न्यायालय कोर्ट संख्या-03 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने मामले को विरल से विरलतम श्रेणी का अपराध मानते हुए दो दोषियों को मृत्युदंड तथा एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। फैसला सुनाते हुए अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि आरोपियों ने संभवतः यह सोच लिया था कि ष्लाश नहीं तो केस नहींष्, लेकिन सच हमेशा सामने आ जाता है। न्यायालय ने कहा कि अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर, सुनियोजित और क्रूरतापूर्ण है, इसलिए यह मामला दुर्लभतम श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
अभियोजन पक्ष के अनुसार पांच जून 2018 को मीरापुर थाना क्षेत्र के खेड़ी गांव के जंगल में एक जला हुआ शव बरामद हुआ था। मेरठ जनपद के बहसूमा क्षेत्र स्थित मौड़ कलां गांव निवासी महावीर की सूचना पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। बाद में शव की पहचान ककरौली निवासी 26 वर्षीय राजेंद्र सैनी के रूप में हुई। जांच के दौरान मृतक के भाई जयविंद्र की तहरीर पर ककरौली निवासी वीरसैन तथा बहसूमा क्षेत्र के मोहम्मदपुर निवासी गजेंद्र उर्फ गीलू और राम किरण उर्फ सावन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस विवेचना में सामने आया कि वीरसैन को संदेह था कि राजेंद्र सैनी उसकी पत्नी से बातचीत करता है। इसी शक के चलते आरोपियों ने चार जून 2018 को राजेंद्र को बहाने से अपने साथ बाइक पर बैठाकर ले गए।
अभियोजन के अनुसार आरोपियों ने पहले राजेंद्र को शराब पिलाई और बाद में उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद पहचान छिपाने और सबूत नष्ट करने के उद्देश्य से शव को जंगल में ले जाकर आग के हवाले कर दिया गया। इसके बाद पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी वीरसैन की मृत्यु हो गई, जिसके चलते उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई। वहीं शेष दो आरोपी गजेंद्र उर्फ गीलू और राम किरण उर्फ सावन के विरुद्ध अदालत में चले लंबे मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य और गवाहों के माध्यम से आरोप सिद्ध कर दिए।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने शनिवार को दोनों दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर संतोष व्यक्त किया। वहीं अदालत की कड़ी टिप्पणी और मृत्युदंड की सजा ने इस मामले को जनपद की चर्चित न्यायिक कार्यवाहियों में शामिल कर दिया है।






