नगर सहित देहात क्षेत्र में संचालित स्कूलों की सुरक्षा मानकों पर भी दिया जाए ध्यान

खतौली। लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद प्रदेशभर में कोचिंग सेंटरों, होटल, लाइब्रेरी और मॉल की सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है, लेकिन कस्बों और गांवों में संचालित छोटे निजी विद्यालयों, मदरसों तथा बिना पंजीकरण चल रहे कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था अब भी जांच के दायरे से बाहर दिखाई दे रही है। शिक्षा के शुरुआती दौर में बच्चों की नींव रखने वाले इन संस्थानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

 

खतौली में भी सुरक्षा मानकों को लेकर चिंता बढ़ी

 

लखनऊ हादसे के बाद शासन और प्रशासन ने विभिन्न सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण शुरू किया है। फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकास, भवन की मजबूती और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। कस्बे में भी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए अग्निकांड के बाद पुलिस प्रशासन ने खतौली में कोचिंग सेंटरों, नर्सिंग होम, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक भवनों में फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान के दौरान सुरक्षा मानकों में कमियां मिलने पर चार कोचिंग सेंटर सील किया गया, जबकि अन्य संस्थानों को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए। हालांकि खतौली नगर क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों में संचालित अनेक छोटे विद्यालय, मदरसे और कोचिंग सेंटर अभी भी प्रशासनिक निगरानी से दूर हैं। कस्बे की तंग गलियों और घनी आबादी वाले मोहल्लों में कई ऐसे निजी स्कूल संचालित हैं, जहां बड़ी संख्या में छोटे बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इनमें से अधिकांश संस्थानों में न तो पर्याप्त खुला स्थान है और न ही किसी आपात स्थिति से निपटने की समुचित व्यवस्था। कई स्कूल किराए के मकानों या छोटे भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां आग लगने, भवन क्षतिग्रस्त होने या किसी अन्य दुर्घटना की स्थिति में बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद कठिन हो सकता है।

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ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिति चिंताजनक

 

केवल नगर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में संचालित अनेक निजी विद्यालयों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। कई स्थानों पर विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं हैं, जबकि आपातकालीन निकास द्वार, सुरक्षा संकेतक और नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं भी नदारद हैं। अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा की उम्मीद से इन संस्थानों में भेजते हैं, लेकिन सुरक्षा के प्रति लापरवाही उनके लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

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बिना पंजीकरण चल रहे कोचिंग सेंटर भी खतरे की घंटी

 

खतौली ग्रामीण क्षेत्र में अनेक कोचिंग सेंटर ऐसे भी हैं जो बिना आवश्यक पंजीकरण और मानकों के संचालित हो रहे हैं। इनमें विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुरक्षा सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। कई कोचिंग सेंटर संकरी इमारतों में संचालित हैं, जहां आपातकालीन निकास की व्यवस्था तक नहीं है। यदि किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो विद्यार्थियों की सुरक्षा गंभीर चुनौती बन सकती है।

 

विशेष अभियान चलाने की मांग

 

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स्थानीय लोगों और अभिभावकों का मानना है कि जिस प्रकार प्रशासन ने कोचिंग सेंटरों, होटल और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की जांच शुरू की है, उसी प्रकार स्कूलों और मदरसों की भी व्यापक जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि सुरक्षा मानकों का पालन केवल बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन छोटे शिक्षण संस्थानों तक भी पहुंचना चाहिए जहां नन्हे बच्चे अपनी शिक्षा की शुरुआत करते हैं। प्रत्येक विद्यालय और कोचिंग सेंटर में अग्निशमन यंत्र, सुरक्षित निकास मार्ग, भवन की नियमित जांच तथा आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में जनहानि को रोका जा सकेगा। लखनऊ हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की हकीकत को उजागर कर दिया है। ऐसे में आवश्यकता है कि प्रशासन केवल बड़े संस्थानों तक सीमित न रहे, बल्कि छोटे विद्यालयों, मदरसों और कोचिंग सेंटरों की भी गहन जांच कर सुरक्षा मानकों को पूरा करायें ताकि बच्चों का भविष्य और जीवन दोनों सुरक्षित रह सकें।

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