भारतीय किसान यूनियन ने उत्तराखंड की सभी इकाइयाँ कीं भंग

प्रदेश प्रभारी से लेकर जिला प्रभारियों तक सभी को किया गया प्रभारमुक्त, जल्द होगी नई समिति की घोषणा

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की उत्तराखंड प्रदेश समन्वय समिति ने बड़ा संगठनात्मक निर्णय लेते हुए प्रदेश प्रभारी सहित मंडल व जिलों के सभी प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से प्रभारमुक्त कर दिया है। यह निर्णय उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष की संस्तुति और समन्वय समिति के विचार-विमर्श के बाद शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया गया है। इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर केन्द्रीय कार्यालय की ओर से सूचना जारी कर दी है।
यूनियन के शीर्ष नेतृत्व की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उत्तराखंड प्रदेश से संबंधित सभी पदाधिकारियों को उनके दायित्वों से मुक्त किया जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि निकट भविष्य में प्रदेश स्तर पर एक बैठक आयोजित कर संगठन की नई संरचना, जिम्मेदारियाँ और आगामी कार्यक्रमों को लेकर समिति के माध्यम से निर्णय लिया जाएगा।

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बताया गया है कि चार दिन पहले सोशल मीडिया पर भाकियू देहरादून जिला अध्यक्ष की नई नियुक्ति से संबंधित एक सूचना वायरल हुई थी, जिस पर संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने कड़ी आपत्ति जताई थी। राष्ट्रीय समन्वय समिति ने तत्काल इस नियुक्ति को अवैध और नियम विरुद्ध घोषित करते हुए निरस्त कर दिया था। भाकियू के शीर्ष नेतृत्व ने यह स्पष्ट किया था कि बिना अनुमोदन या संगठनात्मक प्रक्रिया के किसी भी स्तर पर की गई नियुक्ति अनुशासनहीनता मानी जाएगी। इसी अनुशासन को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड राज्य की सभी इकाइयों को भंग कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में संगठन को नई ऊर्जा और पारदर्शिता देने के लिए जल्द ही नई कमेटी गठित की जाएगी। भाकियू के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड में किसान हितों के मुद्दों को सशक्त रूप से उठाने के लिए संगठनात्मक एकजुटता आवश्यक है, और यही इस कदम का प्रमुख उद्देश्य है। भाकियू की प्रदेश स्तरीय बैठक की तिथि शीघ्र घोषित की जाएगी, जिसमें नई कार्यकारिणी और आगामी आंदोलनों की रणनीति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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