मुज़फ़्फ़रनगर जिला कारागार में बंद 26 वर्षीय विचाराधीन बंदी आदिल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद हड़कंप मच गया है। आदिल महज पांच दिन पहले ही अदालत में पेश होने के बाद जेल भेजा गया था। उसकी मौत के बाद परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि आदिल को जेल के भीतर प्रताड़ित किया गया और पीट-पीटकर मार डाला गया। दूसरी ओर जेल प्रशासन इन आरोपों से साफ इनकार करते हुए कह रहा है कि बंदी की तबीयत खराब थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हुई। अब पूरे मामले की सच्चाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।
मृतक की पहचान शामली जिले के कांधला थाना क्षेत्र के खेड़ा कुरतान निवासी 26 वर्षीय आदिल के रूप में हुई है।
आदिल पर अपनी नाबालिग साली को बहला-फुसलाकर ले जाने, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज था। शिकायत उसकी ससुराल पक्ष की ओर से कराई गई थी। 20 जून को अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में मुज़फ़्फ़रनगर जिला जेल भेजा गया था।
लेकिन जेल जाने के महज पांच दिन बाद शुक्रवार सुबह उसकी मौत की खबर घर पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया।
मृतक के पिता सालिम ने बिलखते हुए जेल प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए।
उनका कहना है कि इन 5 दिनों में जब भी वह बेटे से जेल में मिलने गए, आदिल उनसे कहता था कि उसे जेल के भीतर प्रताड़ित किया जा रहा है।
सालिम का दावा है कि वह गुरुवार को भी बेटे से मिलने जेल गए थे। उनके अनुसार, उन्होंने जेल में कथित तौर पर ‘नंबर कटवाने’ के नाम पर 10,700 रुपये दिए थे। उनका कहना है कि यह रकम जुटाने के लिए उन्हें घर के जेवर तक गिरवी रखने पड़े।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जेलर नीरज श्रीवास्तव ने परिजनों के सभी आरोपों को निराधार बताया है।
उनके अनुसार, आदिल को पेट दर्द की शिकायत थी और 24 जून से ही उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
शुक्रवार सुबह तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर सुबह करीब 5:45 बजे उसे जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान करीब 7 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जेल प्रशासन का कहना है कि बंदी के साथ किसी प्रकार की मारपीट नहीं हुई और मौत बीमारी के चलते हुई।






