शुकतीर्थ के हनुमतधाम में कई फुट पानी भरा, मोलाहेडी मार्ग धंसने से गांवों का सम्पर्क भी टूटा, लोगों के घरों और दुकानों में पानी घुस गया
मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पूरी तरह सक्रिय हुए मानसून ने मुजफ्फरनगर में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले चार दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने शहर से लेकर गांव तक तबाही जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। शहर की सड़कें दरिया में तब्दील हो गई हैं, निचले इलाके और मलिन बस्तियां जलमग्न हैं, लोगों के घरों और दुकानों में पानी घुस गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मकान ढहने, सड़कें धंसने और जलभराव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। नगर की जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह फेल नजर आई और पहली ही तेज बारिश ने विकास कार्यों की पोल खोलकर रख दी।

बुधवार की रात से गुरुवार को दिनभर हुई बारिश के कारण शहर से लेकर गांव देहात तक के अधिकांश हिस्सों में घुटनों तक पानी भर गया। सबसे अधिक परेशानी शहर के निचले इलाकों और मलिन बस्तियों में देखने को मिली। खालापार, रामपुरी, लद्दावाला, सुजड़ू, किदवई नगर, गांधी कॉलोनी, अम्बा विहार, दक्षिणी कृकृष्णापुरी, मिमलाना रोड, शांति नगर, जनकपुरी, अहाता औलिया, नई मंडी क्षेत्र के निचले हिस्सों तथा रामपुर तिराहा के बिजलीघर सहित कई मोहल्लों में गलियां और सड़कें जलमग्न हो गईं। शहरी की पाॅश कालोनियों में भी बारिश के कारण जलभराव से अनेक दिक्कत पेश आई। कई घरों में नालों का गंदा पानी घुस गया, जिससे घरेलू सामान खराब हो गया और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया।

बारिश ने नगर की जल निकासी व्यवस्था की भी पोल खोल दी। जगह-जगह नाले उफनाकर सड़कों पर बहने लगे और मुख्य मार्गों पर घंटों तक जलभराव बना रहा। कई सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और सार्वजनिक परिसरों में भी पानी भर गया। रामपुर तिराहा स्थित बिजलीघर में जलभराव होने से विद्युत व्यवस्था प्रभावित हुई और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। लगातार बारिश के कारण शहर के बाजारों में भी पानी भर गया। दुकानों तक पानी पहुंचने से व्यापारियों का सामान खराब हुआ और ग्राहकों की आवाजाही कम होने से कारोबार पर भी असर पड़ा।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात किसी आपदा से कम नहीं रहे। बुढ़ाना तहसील क्षेत्र के गांव बिटावदा में लगातार 24 घंटे हुई बारिश के कारण एक मकान भरभराकर ढह गया। हादसे में सलाम पुत्र यामीन की पत्नी मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गई। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद महिला को मलबे से बाहर निकालकर निजी अस्पताल में भर्ती कराया। घटना के बाद ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सूचना के बावजूद राजस्व विभाग की टीम काफी देर तक मौके पर नहीं पहुंची, जिससे लोगों में नाराजगी रही।
बुढ़ाना क्षेत्र के गांव लोई में भी भारी जलभराव से गलियां और सड़कें तालाब बन गईं। ग्रामीणों का कहना है कि पहली ही तेज बारिश ने विकास कार्यों की गुणवत्ता की पोल खोल दी। वहीं बिटावदा गांव में भी जलभराव के कारण लोगों का दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। दूसरी ओर, धार्मिक नगरी शुकतीर्थ स्थित प्रसिद्ध हनुमंतधाम परिसर भी बारिश के पानी से भर गया, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यहां पर कई फुट पानी भरने के कारण भागवत भवन और मंदिर के अन्दर तथा प्रसाद स्थल में भी पानी ही पानी हो जाने से राशन भी खराब हो गया।


लगातार बारिश का असर सड़कों पर भी साफ दिखाई दिया। मोलाहेड़ी-जड़ौदा मुख्य मार्ग का एक हिस्सा तेज बहाव के कारण धंस गया, जिससे आवागमन बाधित हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क पहले से कमजोर थी और लगातार बारिश के कारण अचानक पानी का दबाव बढ़ जाने के कारण टूट गई। इससे ग्रामीणों और वाहन चालकों को अपने गांवों में आवागमन करने के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। बारिश के कारण जिले में एक पुलिस चैकी की इमारत भी धराशायी हो गई। लगातार पानी बरसने से जर्जर हो चुकी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हालांकि घटना के समय चैकी में कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
अगले 48 घंटे तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की संभावना
लगातार बारिश का असर केवल मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं रहा। मेरठ, बिजनौर, शामली और सहारनपुर सहित पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी वर्षा के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर नदियां, नाले और तालाब उफान पर हैं, जबकि ग्रामीण संपर्क मार्गों पर जलभराव और कटान की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने, कमजोर भवनों से दूर रहने और अत्यंत आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की अपील की है। वहीं शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग नगर निकाय और प्रशासन से जल निकासी की समुचित व्यवस्था कराने तथा जलभराव वाले इलाकों में तत्काल राहत कार्य शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
