मिंटू संग 251 लीटर की कांवड़ लेकर निकला शिवभक्त शाकिर

मुजफ्फरनगर में लोगों ने दोनों की दोस्ती को सराहा, सेल्फी लेकर बढ़ाया हौसला

कांवड़ यात्रा में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बने दो दोस्त, हरिद्वार से दूसरी बार गंगाजल लेकर लौट रहे शाकिर और मिंटू

मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा के दौरान जहां करोड़ों शिवभक्त भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन हैं, वहीं मेरठ के दो दोस्तों ने सांप्रदायिक सौहार्द और इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है। मेरठ के फलावदा निवासी 21 वर्षीय मुस्लिम युवक शाकिर अपने हिंदू मित्र मिंटू नागोरी के साथ 251 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर हरिद्वार से मेरठ की ओर लौट रहे हैं।

दोनों मित्र 17 जुलाई की रात करीब 10 बजे हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा पर निकले थे। उनकी टोली में अन्य शिवभक्त भी शामिल हैं, लेकिन शाकिर की मौजूदगी और अपने मित्र की आस्था के प्रति उनका सम्मान लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मुजफ्फरनगर से गुजरते समय बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें रोककर शुभकामनाएं दीं, उनके साथ सेल्फी ली और उनकी पहल की सराहना की। मिंटू ने बताया कि शाकिर से उसकी दोस्ती करीब छह साल पुरानी है, ये दोस्ती स्कूल की शिक्षा के दौरान ही हो गई थी, तभी से दोनों एक दूसरे के साथ हैं और धर्म के कारण दोनों के बीच कभी कोई मतभेद नहीं हुए, बल्कि एक दूसरे के पर्व, त्यौहार और धार्मिक आयोजनों में दोनों साथ रहते हैं।

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शाकिर ने बताया कि यह लगातार दूसरा वर्ष है जब वह अपने मित्र मिंटू के साथ कांवड़ यात्रा में शामिल हुए हैं। पिछले वर्ष दोनों ने 101 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाई थी, जबकि इस बार उन्होंने 251 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर यात्रा करने का संकल्प लिया है। यात्रा के दौरान शाकिर अपने मित्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते नजर आए। इतना ही नहीं, रास्ते में मिलने वाले अन्य कांवड़ियों की सहायता भी करते रहे। कहीं कांवड़ संभालने में सहयोग किया तो कहीं थके हुए श्रद्धालुओं की मदद करते दिखाई दिए। उनकी इस सेवा भावना ने यह संदेश दिया कि मानवता, सेवा और सहयोग किसी धर्म या जाति की सीमाओं में बंधे नहीं होते।

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शाकिर और मिंटू का कहना है कि उनकी इस यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था का सम्मान करना ही नहीं, बल्कि समाज में आपसी प्रेम, विश्वास और भाईचारे का संदेश देना भी है। उनका मानना है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है और यदि सभी लोग एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें तो समाज में सौहार्द और सद्भाव और अधिक मजबूत होगा। मुजफ्फरनगर में दोनों मित्रों की यह अनूठी कांवड़ यात्रा लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। राहगीरों और शिवभक्तों ने उनकी पहल को हिंदू-मुस्लिम एकता की सशक्त मिसाल बताते हुए सराहा और सुरक्षित यात्रा की शुभकामनाएं दीं।

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