एक घंटे में बदली जिला अस्पताल की जांच रिपोर्ट, निजी अस्पताल में सुरक्षित हुआ प्रसव, सरकारी जांच में प्लेटलेट्स 82 हजार, निजी लैब में निकले 1.30 लाख, युवक ने लगाए आरोप
मुजफ्फरनगर। जिला महिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गर्भवती महिला की रक्त जांच रिपोर्ट में गंभीर अंतर सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। सरकारी अस्पताल की जांच रिपोर्ट के आधार पर महिला को गंभीर बताते हुए मेरठ रेफर कर दिया गया, जबकि करीब एक घंटे बाद निजी अस्पताल में हुई दोबारा जांच में रिपोर्ट सामान्य मिली और वहीं सुरक्षित प्रसव भी संपन्न हो गया। इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी जांच व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला के पति ने इसे गंभीर त्रुटि बताते हुए जांच की मांग की है।
शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी अमित कुमार की पत्नी पिंकी (29) जिला महिला अस्पताल में प्रसव संबंधी उपचार करा रही थीं। परिजनों के अनुसार प्रसव से पूर्व अस्पताल की लैब में हुई रक्त जांच में प्लेटलेट्स की संख्या मात्र 82 हजार दर्शाई गई। रिपोर्ट आने के बाद स्टाफ नर्स ने स्थिति को गंभीर बताते हुए महिला को मेरठ रेफर कर दिया। जबकि नर्स द्वारा विशेषज्ञ चिकित्सक का कोई भी परामर्श नहीं लिये जाने के आरोप लगाए गए हैं।
अमित कुमार का कहना है कि अचानक मिली इस जानकारी से वे घबरा गए। मेरठ ले जाने के बजाय उन्होंने अपनी पत्नी को शहर के सर्कुलर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां तत्काल दोबारा रक्त जांच कराई गई। निजी लैब की रिपोर्ट में प्लेटलेट्स 1 लाख 30 हजार पाए गए, जो सामान्य और सुरक्षित स्तर पर थे। इसके बाद चिकित्सकों ने वहीं सफलतापूर्वक प्रसव कराया। वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं। पीड़ित अमित कुमार का आरोप है कि सरकारी अस्पताल की कथित गलत रिपोर्ट के कारण परिवार को मानसिक तनाव के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। उनका कहना है कि यदि निजी अस्पताल में दोबारा जांच न कराई जाती और सीधे मेरठ रेफर कर दिया जाता, तो अनावश्यक परेशानी के साथ किसी बड़े खतरे की आशंका भी बनी रहती। उन्होंने मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की बात कही है।
इस सम्बंध में जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. मुरली भास्कर ने बताया कि पैथोलॉजी लैब की रिपोर्ट के आधार पर ही चिकित्सक उपचार संबंधी निर्णय लेते हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही की शिकायत सामने आती है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल की मशीनों का समय-समय पर परीक्षण कराया जाता है, लेकिन मरीज की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता होने के कारण चिकित्सक उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक निर्णय लेते हैं।
