लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और सुभासपा के बीच जुबानी टकराव तेज हो गया है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने का दावा किया, जिसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन पर तीखा पलटवार किया।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए राजभर पर निशाना साधते हुए कहा कि अफवाह फैलाने वाले मंत्री को अब वही लोग ढूंढ़ रहे हैं, जिनसे कथित तौर पर अलग-अलग नामों पर एडवांस लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले टिकट की आस लगाए बैठे लोग सवाल कर रहे थे, लेकिन अब अधिकारी और ठेकेदार भी जवाब मांगने की तैयारी में हैं।
सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में बिना नाम लिए कहा कि “30 सीटों” की चर्चा केवल अफवाह साबित हो रही है। उन्होंने तंज किया कि जिन्हें सीट मिलने की उम्मीद नहीं है, वे बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रांसफर-पोस्टिंग और विभागीय काम दिलाने के नाम पर भी लोगों से रकम लेने की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक विवाद की शुरुआत ओम प्रकाश राजभर के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी में जल्द बड़ी टूट हो सकती है। राजभर ने सपा महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ी एक चिट्ठी का भी जिक्र किया। उन्होंने खनन और गोमती रिवर फ्रंट से जुड़े पुराने मामलों को लेकर सपा पर सवाल उठाए।
राजभर के बयान के बाद भाजपा खेमे से भी सपा पर हमले तेज हुए। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी दावा किया कि सपा के कई सांसद पाला बदलने के लिए तैयार हैं। भाजपा नेताओं के इन बयानों के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में अटकलों का दौर और तेज हो गया है।
अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले पर जवाब देते हुए कहा कि जो डर जाएगा, वही जाएगा। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी भाजपा से मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार है। अखिलेश ने यह भी कहा कि कई भाजपा नेता भी समय आने पर अपना रास्ता बदल सकते हैं।
सपा नेताओं ने राजभर के दावों को राजनीतिक बयानबाजी बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजभर लगातार ऐसे बयान देकर चर्चा में बने रहने की कोशिश करते हैं। दूसरी ओर भाजपा और सहयोगी दल इसे सपा की अंदरूनी बेचैनी से जोड़ रहे हैं।
फिलहाल राजभर के दावे और अखिलेश के पलटवार ने यूपी की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच यह बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।






