PALIKA–अफसरों की लड़ाई में अटका दाखिल खारिज

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् में जनहितों की अनदेखी चरम सीमा पर हो रही है। पालिकाध्यक्ष के आदेशों और नाराजगी जताये जाने के बावजूद भी अधिकारी जनहितों को साधने के लिए संवेदनशील नजर नहीं आ रहे हैं। पालिका में सम्पत्ति नामांतरण को लेकर बड़े पैमाने पर आवेदन आ रहे हैं, लेकिन उनका निस्तारण शून्य ही है। इसका कारण पालिका के दो अधिकारियों के बीच अधिकार को लेकर चली आ रही खींचतान हैं। पालिका के कर विभाग से जांच और शुल्क आदि की प्रक्रिया पूर्ण कर करीब 400 सम्पत्ति नामांतरण पत्रावलियों को तैयार किया गया है, लेकिन इन पर अधिशासी अधिकारी हस्ताक्षर करने को तैयार नहीं है, जिस कारण महीनों से ये पत्रावलियां लम्बित रहने के कारण आवेदकों को मानसिक रूप से उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है। अफसरों की तकरार के बीच अटके दाखिल खारिज के इस प्रकरण में अब शिकायत पालिकाध्यक्ष के दरबार तक पहुंची है। उन्होंने नाराजगी के साथ इसका जल्द निस्तारण कराने के आदेश दिये हैं। ईओ हस्ताक्षर नहीं करते तो एक्ट के अनुसार पालिका बोर्ड से इन पत्रावलियों का निस्तारण कराने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।

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बता दें कि शहरी क्षेत्र में अचल सम्पत्ति खरीद के बाद सम्पत्ति नामांतरण ;दाखिल खारिजद्ध के लिए नगरपालिका परिषद् में आवेदन करना होता है। पालिका में सीमा विस्तार के बाद नए बोर्ड में सम्पत्ति दाखिल खारिज के आवेदन की संख्या में भी इजाफा हुआ है। जुलाई 2022 में तत्कालीन पालिकाध्यक्ष के अधिकार सीज होने के बाद पालिका में व्यवस्था भी बेपटरी हो गई थी और फिर चुनाव आचार संहिता के कारण कामकाज ठप हो जाने से दालिख खारिज के मामले भी लम्बित हो गये थे। मई में पालिका में चार्ज संभालने के बाद पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने जब कार्यालय का औचक निरीक्षण किया तो उनके सामने भी लम्बित दाखिल खारिज प्रकरण की शिकायत आई थी। उस दौरान उनको बताया गया था कि करीब 500 पत्रावलियां लम्बित हैं। इनका निस्तारण करने के लिए उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशील होकर कार्य करने को कहा था। पालिका अध्यक्ष के आदेशों पर काम क्या होता और दो अधिकारियों के बीच उत्पन्न तकरार ने मामला बिगाड़ दिया है।

पालिका के कर अधीक्षक नरेश कुमार शिवालिया और अधिशासी अधिकारी हेमराज सिंह के बीच दाखिल खारिज पत्रावलियों के निस्तारण को लेकर अधिकार का सवाल खड़ा हो गया है। नए बोर्ड के करीब आठ माह के कार्यकाल में अभी तक केवल 200 दाखिल खारिज पत्रावलियों का निस्तारण हो पाया है और वर्तमान में करीब 400 पत्रावलियां ऐसी हैं, जिनको कर विभाग से जांचोपरांत हरी झण्डी तो मिल गई, लेकिन अधिशासी अधिकारी हेमराज सिंह की ना-नुकुर के कारण उनका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा कर विभाग में सैकड़ों पत्रावलियां विभागीय जांच के फेर में लम्बित चल रही हैं। दरअसल, दाखिल खारिज की एक लंबी प्रक्रिया है और सम्पत्ति नामांतरण से जुड़ा मामला होने के कारण इसमें स्थलीय जांच, भौतिक सत्यापन जैसी कार्यवाही करने के साथ ही नोटिस की प्रक्रिया के बाद पत्रावली पूर्ण करनी होती है। जिसमें 45 दिन की समय सीमा तय की गयी है, लेकिन छह-छह महीने बाद भी लोगों को सम्पत्ति नामांतरण का निस्तारण नहीं मिल पा रहा है।

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कर अधीक्षक नरेश शिवालिया का कहना है कि नगरपालिका अधिनियम में प्रावधान है कि सम्पत्ति नामांतरण की पत्रावलियों को अंतिम स्वीकृति नगरपालिका बोर्ड या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत अधिशासी अधिकारी द्वारा किया जायेगा। इस एक्ट के साथ ही शासनादेश में भी अधिशासी अधिकारी को ही अधिकार दिया गया है। कर विभाग के द्वारा करीब 400 सम्पत्ति नामांतरण के आवेदन स्वीकृत कर जांचोपरांत पत्रावलियां तैयार करते हुए अधिशासी अधिकारी को भिजवा चुकी है, लेकिन वो एक्ट को दरकिनार करते हुए हस्ताक्षर करने से इंकार कर रहे हैं, जिस कारण निस्तारण अटका हुआ है। कर अधीक्षक ने इस प्रकरण में पालिकाध्यक्ष को भी अवगत कराया है। पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप का कहना है कि जनहित से जुड़े मामलों में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जायेगी। दाखिल खारिज का प्रकरण गंभीर है, इसमें एक्ट के अनुसार ईओ को कार्य करते हुए जल्द निस्तारण के लिए कहा गया है। वहीं ईओ हेमराज सिंह का कहना है कि दाखिल खारिज प्रकरणों के निस्तारण के लिए उनके द्वारा कर अधीक्षक को अधिकार दिया गया है। उनको लिखित और मौखिक आदेश दिये जा चुके हैं। निस्तारण न होने पर उनसे जवाब लिया जायेगा। दो अधिकारियों की खींचतान के बीच सैंकड़ों लोगों को महीनों से पालिका कार्यालय के चक्कर लगाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। 

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