मंत्री का फूटा गुस्सा, मुख्य अभियंता से तीखी नोकझोंक का वीडियो वायरल, सीई विनोद गुप्ता कार्रवाई कराने पर अडे़, मंत्री बोले-मुकदमा हुआ तो देख लूंगा
मुजफ्फरनगर। शहर में लगातार हो रही बिजली कटौती को लेकर जनता का आक्रोश अब राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया है। क्षेत्रवासियों की शिकायतों के बाद कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता, एसडीओ, जेई तथा मंडी कोतवाली प्रभारी से फोन पर बातचीत कर बिजली व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई। इस दौरान बिजलीघर पर प्रदर्शन को लेकर जेई की ओर से नागरिकों के खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाई को शिथिल करने के लिए मुख्य अभियंता विनोद गुप्ता से कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार की हुई तीखी बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया।
बताया जा रहा है कि क्षेत्र के कुछ लोगों ने रविवार की सुबह मंत्री अनिल कुमार के अंकित विहार स्थित आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और शिकायत की कि पिछले कई दिनों से बिजली आपूर्ति बदहाल है। 24 घंटे के भीतर कई-कई बार बिजली गुल हो रही है, जिससे भीषण गर्मी में आम लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री पोर्टल समेत विभागीय अधिकारियों से कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

मामले की जानकारी मिलने पर मंत्री अनिल कुमार ने अधिकारियों से फोन पर वार्ता की। बातचीत के दौरान उन्होंने मुख्य अभियंता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जनता को परेशान करना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। बातचीत में मंत्री ने यह भी कहा कि पहले जनता की समस्या का समाधान किया जाए, उसके बाद अन्य कार्रवाई की जाए। उन्होंने बिजली आपूर्ति तत्काल सुचारु करने और पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा के निर्देश भी दिए। विवाद उस समय और बढ़ गया जब जानकारी सामने आई कि बिजली विभाग के एक जेई के साथ कथित मारपीट के मामले में मंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। मंत्री ने बातचीत के दौरान कहा कि संबंधित युवकों ने कर्मचारियों से अभद्रता पर माफी मांग ली है और ऐसे में मुकदमा दर्ज करना उचित नहीं होगा। उन्होंने अधिकारियों से मामले पर पुनर्विचार करने की बात कहते हुए इसे निपटाने के निर्देश दिए।
वहीं, विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता विनोद गुप्ता ने मंत्री के आरोपों से अलग पक्ष रखा। उनका कहना है कि देर रात विद्युत आपूर्ति बहाल करने में जुटे विभागीय कर्मचारी के साथ कुछ लोगों ने मारपीट और अभद्रता की थी। इस संबंध में पुलिस को तहरीर दी गई है और विधिक प्रक्रिया के तहत मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दबाव में एफआईआर वापस नहीं ली जाएगी। मुख्य अभियंता का कहना है कि विभागीय कर्मचारी भीषण गर्मी में दिन-रात काम कर रहे हैं और उनके साथ मारपीट जैसी घटनाएं किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकतीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री की ओर से मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया गया, जिसे विभाग ने अस्वीकार कर दिया।
बताया गया है कि सुभाषनगर में 28 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने पर क्षेत्र के लोगों ने बिजलीघर पर जाकर प्रदर्शन किया था, इस दौरान कुछ कर्मचारियों के साथ लोगों की बहस भी हुई थी, इसी पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदर्शन के बाद उन्हें जानकारी मिली कि बिजली विभाग ने 35 से 40 लोगों के खिलाफ मंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस सूचना के बाद लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले ही राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी शहर में लगातार हो रही बिजली कटौती को लेकर विद्युत विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई थी। इसके बावजूद बिजली व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं होने से विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। फिलहाल पूरे मामले में बिजली आपूर्ति की समस्या, विभागीय कर्मचारी से कथित मारपीट और एफआईआर को लेकर मंत्री तथा विद्युत विभाग के बीच अलग-अलग दावे सामने आए हैं। प्रशासन और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।






