डीजल संकट-उद्योगों पर बंदी का खतरा, हजारों एमएसएमई इकाइयां प्रभावित

केंद्र के नए आदेश के बाद उद्योगों को पेट्रोल पंपों से डीजल मिलना बंद, आईआईए ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में उद्योगों के सामने ईंधन संकट गहराता जा रहा है। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय के हालिया आदेश के बाद जिले के हजारों छोटे और मझोले उद्योगों को डीजल की आपूर्ति बाधित हो गई है। पेट्रोल पंपों से उद्योगों के लिए खुले रूप में डीजल की बिक्री पर रोक लगने से उत्पादन प्रभावित होने लगा है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों के संचालन पर संकट खड़ा हो सकता है।

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर अब भारत के औद्योगिक क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच अब डीजल की उपलब्धता को लेकर भी संकट पैदा हो गया है। इसका सीधा असर मुजफ्फरनगर के औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ रहा है, जहां हजारों छोटे और मझोले उद्योगों के सामने संचालन बनाए रखना चुनौती बन गया है।

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सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से कुछ दिन पूर्व जारी किए गए आदेश के बाद उद्योगों को पेट्रोल पंपों से ड्रम, केन अथवा अन्य माध्यमों से खुले रूप में डीजल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। स्थिति यह है कि कई स्थानों पर उद्योग संचालकों को पांच लीटर डीजल तक देने से इंकार किया जा रहा है। इससे उन औद्योगिक इकाइयों की परेशानी बढ़ गई है, जो बिजली आपूर्ति बाधित होने पर जनरेटरों के माध्यम से उत्पादन कार्य संचालित करती हैं। उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि जिले में इंडस्ट्रियल सप्लाई के माध्यम से भी पर्याप्त डीजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में छोटे उद्योग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इनमें प्रिंटिंग, मशीनिंग, फैब्रिकेशन तथा अन्य उत्पादन इकाइयां शामिल हैं, जिनका संचालन डीजल आधारित उपकरणों और जनरेटरों पर निर्भर करता है।

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आईआईए के पूर्व चेयरमैन एवं उद्यमी विपुल भटनागर ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत उद्योगों को पेट्रोल पंपों से लूज अथवा बल्क डीजल नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वाहनों को सीमित मात्रा में डीजल मिल रहा है, लेकिन एमएसएमई क्षेत्र की इकाइयों के लिए डीजल प्राप्त करना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने बताया कि व्यावसायिक उपयोग के लिए निर्धारित विशेष व्यवस्था भी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं है, जिससे उद्योग संचालकों की समस्याएं बढ़ गई हैं। इसमें 125 रुपये प्रति लीटर डीजल दिये जाने की व्यवस्था है, इसके लिए विशेष ड्रम मान्य है, न ड्रम है और न ही डीजल। उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच रहे हैं।

श्री भटनागर के अनुसार जिले में करीब दो से तीन हजार छोटे और मझोले उद्योग इस संकट से प्रभावित हो सकते हैं। पहले से ही बिजली आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है, ऐसे में डीजल की अनुपलब्धता उत्पादन गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। कई इकाइयां बंद होने के कगार पर पहुंच सकती हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से समस्या लगातार बनी हुई है और उद्योग संगठनों ने इसे लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के केंद्रीय कार्यालय की ओर से इस संबंध में दिल्ली और लखनऊ में ज्ञापन भी सौंपा गया है। संगठन ने मांग की है कि उद्योगों के लिए डीजल की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि उत्पादन और रोजगार पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर न केवल उत्पादन पर पड़ेगा, बल्कि हजारों श्रमिकों और उनसे जुड़े परिवारों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।

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