बुढ़ाना में सरकारी जमीन पर कब्जाः डीएम के आदेश पर भारी प्रताप पटवारी!

भूमाफियाओं से मिलीभगत कर गलत पैमाइश करने के भी आरोप, डीएम दो बार दे चुके हैं एसडीएम बुढ़ाना को आदेश, नहीं हो पा रही कार्रवाई

बुढ़ाना तहसील के नायब तहसीलदार और पटवारी पर लगाया सरकारी बंजर जमीन के गाटा नंबर बदलने का आरोप, सीएम पोर्टल पर शिकायत

मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना तहसील क्षेत्र में सरकारी बंजर भूमि को लेकर चल रहा विवाद अब मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। मौजा बुढ़ाना बांगर उत्तरी स्थित जमीन को लेकर शिकायतकर्ता जरगाम ने गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत की है। शिकायत में कुछ लोगों पर सरकारी जमीन पर कथित रूप से कब्जा करने का प्रयास करने तथा तहसील स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कथित मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।

गुरूवार को शहर के एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जरगाम पुत्र स्व. शफीक अहमद निवासी मौहल्ला काजीवाडा उत्तरी बुढ़ाना ने हल्का लेखपाल प्रताप सिंह के साथ ही कानूनगो व नायब तहसीलदार पर कथित भू माफियाओं इमरानु कुरैशी व इन्तजार कुरैशी के साथ ही छोटू प्रधान, मुरसलीन कस्सार, पप्पू सुहैल और गुलजार कुरैशी के साथ मिलीभगत करते हुए सरकार बंजर जमीन पर अवैध कब्जे कराकर भूमि बेचने के कार्य में लिप्त रहने के गंभीर आरोप लगाये हैं।

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शिकायतकर्ता का आरोप है कि गाटा संख्या 1933 को गाटा संख्या 1995 में स्थापित करने के लिए नियमों के विपरीत जाकर अधिकारी कार्य कर भू माफियाओं की मदद कर रहे हैं। इस मामले में पूर्व में गठित संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट और पैमाइश को दरकिनार करते हुए मनमाने ढंग से करीब दो किलोमीटर दूर से पैमाइश कर करीब 50-55 मीटर भूमि का अंतर पैदा कर दिया गया है, क्योंकि सही पैमाइश करने पर अवैध कब्जा साबित होगा और उसको हटवाना पड़ेगाा। आरोप है कि जमीन की वास्तविक स्थिति और अभिलेखों के विपरीत गाटा नंबरों में बदलाव किए गए हैं। इसके साथ ही भूमि की पैमाइश में भी अनियमितता बरतने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होने पर पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है।

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जरगाम ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी भूमि से जुड़े मामले में राजस्व अभिलेखों, मौके की स्थिति और पूर्व में हुई पैमाइश का मिलान कराया जाना जरूरी है, ताकि किसी भी व्यक्ति को कथित रूप से गलत तरीके से लाभ न मिल सके। शिकायत में संबंधित गाटा नंबरों की दोबारा जांच कराने, मौके पर निष्पक्ष पैमाइश कराने तथा यदि अभिलेखों में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। उनका कहना है कि दो तीन बार वो डीएम से भी मिले। डीएम ने एसडीएम बुढ़ाना को लेखपाल से अलग हटकर जांच कराने के आदेश भी दिये, लेकिन हर बार लेखपाल और नायब तहसीलदार को ही जांच दे दी जाती है और वो अधिकारियों को अपने स्वार्थवश गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने मामले की जांच दूसरी तहसील के अधिकारियों से कराये जाने और अवैध कब्जा हटवाने की मांग की है। मामला मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंचने के बाद अब राजस्व विभाग की जांच और कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी भूमि के गाटा नंबरों में वास्तव में कोई बदलाव अथवा पैमाइश में अनियमितता हुई है या नहीं।

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