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नगरपालिका परिषद के एनएसए डॉ. अजय शाही के खिलाफ शासन में जांच शुरू

कंपनी बाग से लीची, बैल पत्थर सहित अन्य फलदार वृक्षों का कटान कराये जाने और पालिका वाहनों के डीजल में कथित भ्रष्टाचार प्रकरण में आया नया मोड़

मुजफ्फरनगर। नगर पालिका परिषद में लंबे समय से विवादों और शिकायतों के घेरे में रहे नगर सुरक्षा अधिकारी (एनएसए) डॉ. अजय प्रताप शाही के खिलाफ अब शासन स्तर पर जांच की तलवार लटक गई है। कंपनी बाग से फलदार वृक्षों की अवैध कटान से लेकर डीजल वितरण में कथित भ्रष्टाचार तक के आरोपों में प्रशासन के स्तर पर जांच का सामना कर रहे एनएसए डॉ. शाही के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर से भी जांच शुरू करा दी गई है। इसमें एसीएस फोरेस्ट को शिकायत के आधार पर फलदार वृक्षों का कटान किये जाने में जांच सौंपी गई है।
नगरपालिका परिषद मुजफ्फरनगर में तैनात एनएसए डॉ. अजय प्रताप शाही के खिलाफ चल रहे आरोपों के मामले में अब नया मोड़ आया गया है। उनके खिलाफ उठी शिकायतों पर अब शासन ने भी औपचारिक जांच बिठा दी है। यह कार्रवाई सभासद राजीव शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी गई शिकायत के बाद शुरू हुई, जिसमें अनेक गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया था।

भाजपा नेता एवं पालिका के सभासद राजीव शर्मा ने 6 नवम्बर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर एनएसए डॉ. शाही की शिकायत की थी। सभासद ने आरोप लगाये हैं कि पालिका के अधीन आने वाले पार्क कम्पनी बाग की चल और अचल संपत्ति की देखरेख वाटिका प्रभारी होने के कारण एनएसए डॉ. शाही के जिम्मे हैं, वहां पर लगे अमरूद, आम, लीची, बैल पत्थर सहित अन्य फलदार वृक्षों को वन विभाग के नियमों के विपरीत काटकर खुर्दबुर्द कर दिया गया। इससे पालिका को तो आर्थिक क्षति हुई ही, साथ ही पर्यावरणीय क्षति भी की गई, जो गंभीर अनियमितता है। इसमें सभासद राजीव शर्मा ने कहा कि 13 अक्टूबर को लोगों को समाचार पत्रों में आई खबर के कारण ही इस धांधली का पता चला। इसी दिन हुई पालिका की बोर्ड मीटिंग में भी यह मामला उठाया गया था। वृक्ष कटान के साक्ष्यों को भी मिटाने का काम किया गया। सभासद ने आरोप लगाते हुए कहा कि एनएसए ने इस प्रकरण के सामने आने के बाद भी कोई सख्त कदम नहीं उठाया और लापरवाही बरती, उनके खिलाफ एफआईआर, पद से हटाकर जांच कराने और पालिका से उनको पदमुक्त करने की मांग के साथ ही पालिका में वाहनों को डीजल वितरण में पूर्व में कर्मचारियों द्वारा लगाये गये भ्रष्टाचार के आरोपों की भी जांच कराने की मांग की।

सभासद द्वारा मुख्यमंत्री से की गई शिकायत पर गंभीर संज्ञान लिया गया है। 27 नवम्ब्र को मुख्यमंत्री के विशेष सचिव ईशान प्रताप सिंह ने मामले पर जांच आदेश जारी किए हैं। शासन स्तर पर जांच की जिम्मेदारी अपर मुख्य सचिव एसीएस वन एवं पर्यावरण को सौंपी गई है, जो मामले की समग्र पड़ताल करेंगे। इससे प्रकरण और भी गंभीर मोड़ लेता नजर आया है। इससे पहले सभासद राजीव शर्मा और मनोज वर्मा ने डीएम से की गई शिकायत में आरोप लगाया है कि नगरपालिका के कंपनी बाग क्षेत्र में फलदार वृक्षों का अवैध रूप से कटान कराया गया, जिससे न केवल हरित कानूनों का उल्लंघन हुआ, बल्कि नगर की हरियाली को भी नुकसान पहुंचा। इसी के साथ नगरपालिका संचालन में उपयोग होने वाले डीजल की खरीद और उपयोग से जुड़े प्रकरण में भी भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई है। शिकायतों में कहा गया है कि डीजल की खपत के नाम पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं, जिसकी विस्तृत जांच आवश्यक है। शिकायतों के बाद जिलाधिकारी ने भी इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए दो सदस्यीय जांच दल गठित किया है, जो एनएसए डॉ. अजय प्रताप शाही के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जिलास्तरीय जांच कर रहा है। वहीं डॉ. अजय शाही ने इससे पहले सभासद राजीव शर्मा व मनोज वर्मा की भी शिकायत की थी, जिस पर भी जांच चल रही है। इसमें अब निगाहें शासन द्वारा एनएसए के खिलाफ शुरू कराई गई जांच पर टिकी हैं। एसीएस द्वारा की जाने वाली जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि नगर पालिका प्रशासन में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप कितने सही हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई तय होती है।
वहीं एनएसए डॉ. अजय प्रताप शाही लगातार दावा करते रहे हैं कि उन पर लगाये गये आरोप बेबुनियाद हैं। कम्पनी बाग के पेड़ काटने पर उनका कहना है कि वहां पर चल रहे निर्माण कार्यों के दौरान ही पेड़ मिट्टी कटान के कारण जड़ से गिर गये थे, जो स्थल पर ही हैं। डीजल में अनियमितता पर वो दावा करते हैं कि उनके आने के बाद डीजल में हो रही अनावश्यक खपत बंद हुई और पालिका को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। उनका कहना है कि जो भी आरोप हैं, वो उनकी जांच का सामना कर रहे हैं और जांच दल को अपना जवाब देंगे।

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