MUZAFFARNAGAR-डीएम के फर्जी साइन करने में फंसे बाॅलीवुड एक्टर नवाजुद्दीन के भाई

मुजफ्फरनगर। जनपद में धोखाधड़ी के यूं तो अनेक मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को ही चौंका दिया है। इस धोखाधड़ी में बाॅलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के भाई सहित उनका विरोधी भी फंसा है। दोनों के बीच कृषि भूमि को लेकर चल रहे विवाद में जिलाधिकारी न्यायालय की ओर से चकबंदी विभाग के नाम एक आॅर्डर तैयार करते हुए फर्जी साइन कर उसको जारी कर दिया। डीएम के सामने मामला पहुंचा तो वो अपना फर्जी आॅर्डर देखकर हतप्रभ रह गये। डीएम के आदेश पर एसडीएम बुढ़ाना और एडीएम प्रशासन ने जांच की तो पत्र फर्जी पाया गया। जांच के दौरान दोनों को बुलाया गया तो फर्जी आॅर्डर के लिए वो एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने लगे। मामला साफ नहीं होने पर डीएम के आदेश पर उनकी कोर्ट के पेशकार ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। अब पुलिस अपनी जांच में यह साफ करेगी कि असली मुल्जिम कौन है?

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जिलाधिकारी न्यायालय के पेशकार राजकुमार ने थाना बुढ़ाना में तहरीर देकर बाॅलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के भाई शेख अयाजुद्दीन नम्बरदार पुत्र नवाबुद्दीन निवासी मौहल्ला काजीवाडा कस्बा बुढ़ाना और उसके विपक्षी जावेद इकबाल पुत्र सगीर अहमद निवासी बुढ़ाना के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पेशकार राजकुमार द्वारा बताया गया कि डीएम के आदेश पर यह मुकदमा कायम किया गया है। तहरीर में बताया गया कि अयाजुद्दीन के द्वारा 12 दिसम्बर 2023 को अपनी कृषि भूमि के लिए विपक्षी जावेद इकबाल के साथ चल रहे विवाद को लेकर अपने आईजीआरएस सन्दर्भ प्रार्थना पत्र के साथ जिलाधिकारी न्यायालय से 08 दिसम्बर 2023 को जारी दिखाया गया एक कथित आदेश पत्र की प्रति भी चकबंदी विभाग के कार्यालय को दी गई थी और प्रकरण का निस्तारण उसके पक्ष में करने का आग्रह किया गया था। इसी बीच जिलाधिकारी न्यायालय से ऐसा कोई भी आदेश नहीं होने की जानकारी मिलने पर 08 दिसम्बर 2023 के डीएम कोर्ट के कथित आदेश पत्र की जांच कराई गई। इसके लिए उप जिलाधिकारी बुढ़ाना ने 29 फरवरी 2024 को अपनी जांच आख्या प्रस्तुत की। इस जांच के निष्कर्ष में कहा गया कि डीएम कोर्ट से कथित आदेश अयाजुद्दीन और उसके विरोधी पक्ष जावेद इकबाल ने एक दूसरे को हानि पहुंचाये जाने के उद्देश्य से दिया जाना परिलक्षित हुआ है। एसडीएम की जांच में भी यह साफ नहीं हुआ कि डीएम कोर्ट का यह फर्जी आदेश दोनों में से किसने तैयार कराया।

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इसके बाद एसडीएम बुढ़ाना की आख्या पर एडीएम प्रशासन नरेन्द्र बहादुर सिंह द्वारा जांच की गई। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट 06 मार्च 2024 को जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी को सौंपी। इसमें डीएम कोर्ट का 08 दिसम्बर का आदेश फर्जी तो पाया गया, लेकिन इसके लिए दोनों में दोषी कौन था, यह साफ नहीं हो पाया। डीएम बंगारी ने कोर्ट का फर्जी आदेश तैयार कर विभाग को जारी करने के प्रकरण को बेहद गंभीरता से लेते हुए 06 मार्च को ही आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिये। राजकुमार ने बताया कि एसडीएम की जांच आख्या और एडीएम प्रशासन की जांच रिपोर्ट की काॅपी भी पुलिस को सौंप दी गई है। एडीएम प्रशासन नरेन्द्र बहादुर सिंह ने बताया कि दोनों के बीच भूमि की चकबंदी को लेकर विवाद है। ऐसे में प्रकरण जिलाधिकारी न्यायालय में विचाराधीन है। डीएम कोर्ट का चकबंदी विभाग के लिए एक फर्जी आॅर्डर बनाकर डीएम के फर्जी हस्ताक्षर करते हुए चकबंदी कार्यालय में जमा कराया गया। दोनों एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। मुकदमा दर्ज कराया गया है, अब पुलिस जांच में साफ हो पायेगा कि यह पत्र किसने जारी कराया है।

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थाना बुढ़ाना के प्रभारी निरीक्षक आनन्द देव मिश्रा ने बताया कि डीएम के पेशकार की तहरीर पर अयाजुद्दीन और जावेद इकबाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। मामले की विवेचना कस्बा चौकी इंचार्ज उप निरीक्षक जयवीर सिंह चौधरी को सौंपी गई। विवेचनाधिकारी एसआई जयवीर ने बताया कि दोनों डीएम कोर्ट का फर्जी पत्र जारी करने के आरोपी बनाये गये हैं। मामले की जांच प्रारम्भ कर दी गई है। 

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