पालिका में अभी सुलग रही वर्क ऑर्डर प्रकरण की चिंगारी

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् के 204 निर्माण कार्यों में जांच के बाद 31 निर्माण कार्य निरस्त हो जाने के बाद नये सिरे से शेष निर्माण कार्यों के वर्क ऑर्डर जारी करने का काम तेजी से किया जा रहा है, लेकिन इस बीच इन निर्माण कार्यों की स्वीकृति के बाद रोक के बावजूद भी ठेकेदारों को दो निर्माण कार्यों के वर्क ऑर्डर जारी हो गये थे, जिसके कारण कई गंभीर आरोप सामने आये। बाद में यह प्रकरण ठण्डे बस्ते में जाता नजर आया, लेकिन इस प्रकरण की जांच की आंच अभी ठण्डी नहीं पड़ी है। मामले में दो लिपिकों की गर्दन फंसी हुई है तो वहीं ठेकेदारों से भी जवाब तलब किया जा रहा है।

नगरपालिका परिषद् की अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने शहर के सभी 55 वार्डों में सीसी सड़क और नाली के साथ ही अन्य 204 निर्माण कार्यों का प्रस्ताव किया था। जुलाई 2024 की बोर्ड मीटिंग में इसको स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण विभाग ने टैण्डर आमंत्रित किये थे। टैण्डर डलने के बाद स्वीकृत कार्यों को कराने के लिए पालिका प्रशासन ने अपनी तैयारी पूरी की और करीब 100 निर्माण कार्यों के लिए अनुबंध होने के बाद इनके वर्क ऑर्डर पर पालिका ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने हस्ताक्षर करते हुए निर्माण विभाग को ठेकेदारों को जारी करने के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी थी, लेकिन इसी बीच अचानक ही पूल का शोर मचा और मामला डीएम तक पहुंचने के बाद ईओ प्रज्ञा सिंह ने निर्माण विभाग के अधिकारियों और लिपिकों को वर्क ऑर्डर जारी नहीं करने की सख्त हिदायत दी थी, इसके बावजूद दो वार्डों 25 और 07 के लिए स्वीकृत कार्यों के वर्क ऑर्डर निर्माण विभाग से ठेकेदारों को जारी कर दिये गये, जिसके आधार पर ठेकेदारों ने मौके पर निर्माण कार्य प्रारम्भ भी करा दिया था। हंगामा हुआ तो ये दोनों काम भी रूकवा दिये गये थे।

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41 सभासदों की शिकायत पर ईओ ने जांच की और 34 निर्माण कार्यों को गलत साबित होने पर निरस्त करने की संस्तुति की। पालिकाध्यक्ष ने 31 निर्माण कार्य निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया था। इनमें से वार्ड 25 और वार्ड 07 के निर्माण कार्य को जनहित में आवश्यक मानकर पूर्ण कराने के निर्देश दिये गये थे, लेकिन ईओ ने दोनों कार्यों के वर्क ऑर्डर रोक के बावजूद भी ठेकेदारों को जारी कर दिये जाने के मामले में निर्माण विभाग के लिपिक मनोज कुमार को 17 मई को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा कि 100 निर्माण कार्यों के वर्क ऑर्डर पर हस्ताक्षर के बाद रोक लगाये जाने के बावजूद भी दो वार्डों के ठेकेदारों को वर्क ऑर्डर कैसे जारी कर दिये गये?

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19 मई को लिपिक मनोज कुमार ने अपना स्पष्टीकरण ईओ को भेज दिया। मनोज ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि 100 निर्माण कार्यों की टैण्डर प्रक्रिया पूर्ण होने पर सहायक अभियंता निर्माण ने विभागीय आख्या को स्वीकृत करते हुए पत्रावली 27 फरवरी 2025 को ईओ के समक्ष प्रस्तुत करा दी थी। इस आख्या और स्वीकृति पर सहमति प्रदान करते हुए ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी थी। इसके बाद 28 फरवरी को उन्होंने यह वर्क ऑर्डर डिस्पेच रजिस्टर में चढ़ाये। मनोज ने ईओ को भेजे जवाब में बताया कि उसी समय निर्माण विभाग के ही लिपिक निपुण कन्नौजिया ने उक्त दोनों वार्डों के वर्क ऑर्डर सम्बंधित ठेकेदारों को प्राप्त करा दिये थे। ईओ के मना करने के उपरांत इसमें कोई वर्क ऑर्डर उनके द्वारा जारी नहीं किया गया है। इस मामले में लिपिक निपुण कन्नौजिया से भी ईओ द्वारा स्पष्टीकरण मांगा गया है। निपुण ने दोनों वर्क ऑर्डर जारी करने का आरोप मनोज कुमार पर लगाते हुए डिस्पेच रजिस्टर भी प्रस्तुत किया और उसमें सम्बंधित ठेकेदारों को वर्क ऑर्डर देने के लिए इन्द्राज की गई मनोज की तहरीर को साक्ष्य बताते हुए खुद को बेकसूर बताया है। डिस्पेच रजिस्टर में लिखावट मनोज की राइटिंग से मेच बताई जा रही है।

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अब इस प्रकरण में दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए सम्बंधित ठेकेदारों से भी ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने जवाब मांगा है। ठेकेदारों से पूछा गया है कि वो अपने स्पष्टीकरण में यह बतायें कि उनको वर्क ऑर्डर निर्माण विभाग से किस लिपिक के द्वारा प्राप्त कराये गये थे। एक ठेकेदार ने ईओ के समक्ष ये साफ कर दिया है कि उनको ये याद नहीं है कि वर्क ऑर्डर किस लिपिक ने प्राप्त कराये हैं, इस बारे में वो कोई भी स्पष्ट मत नहीं दे सकते हैं। इससे साफ है कि यह मामला पूरी तरह से उलझ चुका है और ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह की जांच किसी भी निष्कर्ष पर पहुंच नहीं पा रही है। उनका कहना है कि अब ये ठेकेदार ही स्पष्ट कर सकते हैं कि उनको वर्क ऑर्डर कैसे मिले, लेकिन वो बताना नहीं चाह रहे हैं, जांच अभी जारी है।

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