26 नवंबर से दिल्ली समेत 100 जगहों पर बड़ा किसान आंदोलनः राकेश टिकैत

किसान हितों को लेकर एसकेएम ने किया 10 अगस्त से देशव्यापी आंदोलन चलाने का ऐलान

संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय सम्मेलन में एमएसपी कानून, कर्ज माफी और भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते का विरोध

नई दिल्ली। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने नई दिल्ली स्थित केदारनाथ साहनी ऑडिटोरियम में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया और देशभर से पहुंचे किसान प्रतिनिधियों को संबोधित किया। सम्मेलन में किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की गई। राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों की लगातार अनदेखी की जा रही है। यदि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी और अन्य लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो संयुक्त किसान मोर्चा देशव्यापी आंदोलन को और तेज करेगा।

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सम्मेलन में सात प्रमुख मांगों को पारित किया गया। इनमें भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का विरोध, सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसानों और मजदूरों का पूर्ण कर्ज माफ करना, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा, चारों श्रम संहिताओं को समाप्त करना, मनरेगा को 200 दिन रोजगार और 700 रुपये दैनिक मजदूरी के साथ बहाल करना तथा बिजली निजीकरण, बीज और भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रस्तावित कानूनों को वापस लेने की मांग शामिल है।

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संयुक्त किसान मोर्चा ने घोषणा की कि 10 अगस्त को देशभर में एक हजार स्थानों पर जेल भरो, रेल रोको और सड़क रोको जैसे विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 17 अगस्त को प्रधानमंत्री, सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, विपक्ष के नेताओं, सांसदों और विधायकों को मांगों का चार्टर सौंपा जाएगा। सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी दो महीनों में राज्यों में किसान सम्मेलन, पदयात्राएं, ट्रैक्टर मार्च और महापंचायतें आयोजित कर आंदोलन की तैयारी की जाएगी। 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी शहीद दिवस पर ग्राम महापंचायत आयोजित होगी, जबकि 26 नवंबर 2026 से नई दिल्ली सहित देशभर के 100 स्थानों पर बड़े किसान मार्च और लंबे आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। सम्मेलन में दिल्ली सरकार से सिंघू बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए 736 किसानों की स्मृति में शहीद स्मारक के लिए भूमि उपलब्ध कराने तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए प्रभावी सार्वजनिक बीमा एवं आपदा प्रबंधन व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई।

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