महर्षि शुकदेव आश्रम में पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सहित विभिन्न आश्रमों के संतों का किया सम्मान, गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण का दिया संदेश
मुजफ्फरनगर। भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन मूल्यों का सर्वोच्च मार्गदर्शक माना गया है। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर तीर्थ नगरी शुकतीर्थ श्रद्धा और आस्था का केंद्र बनी रही, जहां प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं नगर विधायक कपिल देव अग्रवाल ने संत-महात्माओं का आशीर्वाद लेकर गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित किया।

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा नगर विधायक कपिल देव अग्रवाल ने तीर्थ नगरी शुकतीर्थ पहुंचकर संत-महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने महर्षि शुकदेव आश्रम में पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया तथा विभिन्न आश्रमों में विराजमान संतों और गुरुजनों का तिलक कर सम्मान किया।
इस अवसर पर कपिल देव अग्रवाल ने महर्षि वेदव्यास जयंती एवं भारतीय संस्कृति की अमूल्य गुरु-शिष्य परंपरा के प्रतीक गुरु पूर्णिमा पर्व पर देश और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु ही व्यक्ति को ज्ञान, संस्कार, सेवा, सदाचार और जीवन के सही मार्ग का बोध कराते हैं। गुरु के सान्निध्य से ही व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है और वह समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित होता है। उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा और उद्देश्य भी प्रदान करते हैं। गुरु का आशीर्वाद व्यक्ति को आत्मविश्वास, नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। भारतीय संस्कृति की यह महान परंपरा आज भी समाज को एकता, सद्भाव और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही है।
राज्यमंत्री कपिल देव ने सभी नागरिकों से गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने गुरु द्वारा बताए गए आदर्शों, मूल्यों और जीवन-दर्शन का अनुसरण करते हुए सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शुकतीर्थ स्थित आश्रमों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने संत-महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त कर पूजा-अर्चना की और धार्मिक आयोजनों में भाग लिया। पूरे क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
