मुजफ्फरनगर में ड्यूटी में लापरवाही पर 13 पुलिसकर्मी निलंबित

सांसद हरेंद्र मलिक के पुलिस निगरानी के बावजूद सहारनपुर पहुंचने और रात में दंगा से जुड़े पोस्टर लगने के बाद कार्रवाई।

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में 13 पुलिसकर्मी निलंबित किए गए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने रात्रि गश्त, पिकेट और विशेष कानून एवं शांति व्यवस्था ड्यूटी में लापरवाही मिलने पर पांच उपनिरीक्षकों और आठ आरक्षियों के खिलाफ कार्रवाई की। निलंबन को सांसद हरेंद्र मलिक के पुलिस निगरानी के बावजूद सहारनपुर पहुंचने और रात में दंगा से जुड़े पोस्टर लगाए जाने के मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है।

रात्रि गश्त और पिकेट ड्यूटी में मिली लापरवाही

पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सात सितंबर को एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने जिले में रात्रि गश्त, पिकेट और विशेष कानून एवं शांति व्यवस्था ड्यूटी की समीक्षा की। इसमें निर्धारित जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही सामने आने पर कुल 13 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।

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कार्रवाई की जद में पांच उपनिरीक्षक और आठ आरक्षी आए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, निलंबित उपनिरीक्षकों में पंकज सागर, मुकुल कुशवाहा, नितिन कुमार और यशपाल शामिल हैं। पांचवें उपनिरीक्षक और निलंबित आठ आरक्षियों के नामों की पूरी आधिकारिक सूची अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है।

पुलिस निगरानी के बावजूद सहारनपुर पहुंचे सांसद

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर से जुड़े मस्जिद प्रकरण को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल का सहारनपुर जाने का कार्यक्रम था। मुजफ्फरनगर से सपा सांसद हरेंद्र मलिक भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे।

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कानून एवं शांति व्यवस्था को देखते हुए सांसद के प्रेमपुरी स्थित आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया था। उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए पुलिस निगरानी में रखे जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बावजूद सांसद हरेंद्र मलिक वहां से निकलकर सहारनपुर पहुंच गए। इस घटनाक्रम के बाद उनकी निगरानी में लगाए गए पुलिसकर्मियों की सतर्कता और ड्यूटी निर्वहन पर सवाल उठे।

रात में लगे दंगा बरसी से जुड़े पोस्टर

दूसरा मामला वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों  से जुड़े पोस्टर लगाए जाने का है। रात के समय शहर में पोस्टर लगने की जानकारी सामने आने के बाद रात्रि गश्त, पिकेट ड्यूटी और पुलिस के सूचना तंत्र की सक्रियता पर सवाल खड़े हुए।

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सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील विषय से जुड़े पोस्टर लगाए जाने के कारण जिले में कानून एवं शांति व्यवस्था की ड्यूटी पहले से महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। इसके बावजूद रात में पोस्टर लगाए जाने की समय रहते जानकारी नहीं मिलने को ड्यूटी में लापरवाही से जोड़कर देखा गया।

पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि किस पुलिसकर्मी को किस स्थान अथवा घटना से संबंधित लापरवाही के आधार पर निलंबित किया गया है।

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