मुजफ्फरनगर-पेयजलापूर्ति ठप करने पर ठेकेदार की जमानत राशि जब्त

नगरपालिका के जलकल एई अनुज कुमार ने नई और पुरानी फर्मों को जारी किया नोटिस, ट्यूबवैल संचालन के लिए लगे स्काडा ओटोमेशन सिस्टम को हैक करने पर कार्रवाई

मुजफ्फरनगर। शहर में पेयजलापूर्ति व्यवस्था में लापरवाही और तकनीकी प्रणाली से छेड़छाड़ करते हुए आपूर्ति को ठप कर दिये जाने के प्रकरण में जांच का दायरा आगे बढ़ा है। नगर पालिका प्रशासन द्वारा ट्यूबवैल संचालन के लिए लगाए गए स्काडा ऑटोमेशन सिस्टम को हैक कर पेयजलापूर्ति बाधित किए जाने के मामले में विभागीय अधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए इसके लिए प्रथम दृष्टया दोषी माने जा रहे संबंधित ठेकेदार की जमानत राशि जब्त करने के साथ ही पेयजलापूर्ति के लिए कार्य देख रही नई और पुरानी फर्मों के मालिकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही गंभीर कार्यवाही की चेतावनी भी दी है।

उल्लेखनीय है कि नगरपालिका परिषद् के अधीन शहर में 81 ट्यूबवैल संचालित हैं। इनमें से 70 ट्यूबवैल को स्काडा ओटोमेशन सिस्टम से जोड़कर ऑनलाइन संचालन किया जा रहा है। बुधवार को स्काडा ओटोमेशन सिस्टम को हैक कर सर्वर डाउन कर दिया गया, जिससे ट्यूबवैलों का संचालन नहीं होने के कारण पेयजलापूर्ति ठप हो गई। मामले में 24 घंटे तक आपूर्ति नहीं होने का आरोप लगाते हुए गुरूवार को सभासद राजीव शर्मा, मनोज वर्मा, रजत धीमान, रविकांत शर्मा और शौकत अंसारी ने ईओ को लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की। इसमें गुरूवार को ही ईओ के निर्देश पर एई जलकल अनुज कुमार ने विभाग के दोनों जेई धर्मवीर सिंह और जितेन्द्र कुमार को जांच सौंपते हुए रिपोर्ट मांगी थी।

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एई अनुज कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया जांच में यह सामने आया है कि पुरानी फर्म प्रियांग इंटरप्राजेज प्रा.लि. गाजियाबाद के मालिकों अंशुल सिंह और इंद्रकुमार के द्वारा जानबूझकर स्काडा ऑटोमेशन सिस्टम को हैक कर सर्वर डाउन किया गया और ट्यूबवैलों का संचालन ठप कर दिया गया। इसके साथ ही सिस्टम के संचालन के लिए नई फर्म सर्वेश इंटरप्राइजेज प्रा. लि. लखनऊ को लापरवाही के लिए नोटिस जारी कर फर्म मालिक सर्वेश सिंह को भी नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। एई अनुज कुमार ने बताया कि प्रियांक इंटरप्राइजेज की जमानत राशि करीब 13 लाख रुपये की एफडी को जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा जांच रिपोर्ट आने पर आगामी कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। इस तरह की तकनीकी गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

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टैंडर की लड़ाई में नई और पुरानी फर्म के बीच चल रहा है विवाद

बता दें कि नगरपालिका के जलकल विभाग में ओटोमेशन टैंडर की लड़ाई में नई और पुरानी फर्मों के बीच विवाद चल रहा है। इसी का नतीजा रहा कि पूरा सिस्टम ही हैक कर पेयजलापूर्ति को ठप कर दिया गया। साल 2015 से पहले तक शहरी क्षेत्र में पेयजलापूर्ति के लिए सभी ट्यूबवैल मानव संसाधन पर आधारित थे और मैनुअली चलाये जाते थे, लेकिन तत्कालीन चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने स्काडा ओटोमेशन सिस्टम की शुरूआत की। उनके काल में टैंडर निकले तो अंशुल सिंह और इंद्र कुमार की फर्म मैसर्स प्रियांक इंटरप्राइजेज प्रा. लि. गाजियाबाद को यह जिम्मेदारी मिली। उन्होंने पालिका में स्काडा ओटोमशन सिस्टम लगाया और तभी से ट्यूबवैल ऑनलाइन सिस्टम के अधीन आ गये।

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इसके बाद से लगातार प्रियांक इंटरप्राइजेज के पास ही यह जिम्मेदारी चलती रही। साल 2025 में इसके लिए नया टैंडर निकाला गया। इसमें पांच फर्म ने भागीदारी की, एल-1 श्रेणी की शर्त पूरी करने वाली नई कंपनी सर्वेस इंटरप्राइजेज प्रा. लि. लखनऊ को टैंडर स्वीकृत हुआ, लेकिन समय से वर्क ऑर्डर नहीं मिलने पर फर्म मालिक सर्वेस सिंह ने मंडलायुक्त को शिकायत की। अपर नगरायुक्त राकेश यादव ने जांच बैठा दी, तो आनन फानन में जलकल विभाग ने सर्वेस सिंह को वर्क ऑर्डर जारी किया, लेकिन उनको एक जुलाई से कार्य शुरू करने की शर्त के साथ, ऐसे में अंशुल और इंद्र की कंपनी 2026 में तीन माह तक कार्य करती रही। इसमें विभागीय अधिकारियों की धांधली शामिल रही। दबाव में सर्वेस को कार्य तो दिया गया, लेकिन विवाद कायम रहा और अब बात सिस्टम हैक करने तक पहुंच चुकी है।

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