मुजफ्फरनगर-रिटायर्ड इंजीनियर को डिजीटल अरेस्ट कर ठगे 33 लाख

शातिर ठग के डिजीटल अरेस्ट में रहने के कारण रिटायर्ड इंजीनियर सुध खो बैठे और उसके चंगुल में फंस गये।

मुजफ्फरनगर। सेवानिवृत्त इंजीनियर बडे फ्राड का शिकार हो गए। साइबर अपराधियों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर मनी लांड्रिंग के आरोपों में फंसाया, मुकदमा, वारंट और गिरफ्तारी का भय दिखाकर 33 लाख से अधिक की रकम खातों में जमा कराई। ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
सूत्रों के अनुसार अपराधियों ने सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रहने वाले सेवानिवृत्त इंजीनियर राजेंद्र गोयल को छह सितंबर की सुबह नौ बजकर सात मिनट पर मोबाइल पर आई कॉल में बताया कि वह भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से बात कर रहे हैं। उन पर आरोप लगाया कि वह गैर कानूनी विज्ञापन, धोखा व परेशान करने वाले संदेश भेजे रहे हैं। कार्रवाई के लिए यह केस दरियागंज दिल्ली पुलिस स्टेशन भेज दिया है। इसके बाद उनके पास दूसरा फोन आया, जिसमें कॉलर ने अपना नमा विजय खन्ना बताया और दरियागंज पुलिस स्टेशन से खुद को बड़ा अधिकारी बताते हुए बात की। विजय खन्ना ने व्हाट्सएप कॉल कर बताया कि उनके विरुद्ध गैर कानूनी कार्यों एवं मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत मिली है। फोन पर कहा गया कि उन्होंने एक नया खाता केनरा बैंक में खोला है। राजेंद्र गोयल के मना करने पर उन पर खाता खोलना स्वीकार करने का दबाव बनाया। बात न मानने पर उनके विरुद्ध अरेस्ट वारंट जारी होने की जानकारी देते हुए स्पेशल टीम द्वारा गिरफ्तारी करने की बात बताकर डराया गया।
फोन करने वाले ने रिटायर्ड इंजीनियर राजेंद्र गोयल के साथ पूरी सहानुभूति भी दिखाई और उनको बचाने का भरोसा भी दिया। इस अज्ञात अधिकारी विजय खन्ना ने उनको अरेस्ट वारंट निरस्त करने व खुली जांच करने के लिए न्यायाधीश एवं ईडी अधिकारी राहुल गुप्ता नई दिल्ली के नाम एक प्रार्थना पत्र लिखने को कहा। हैरत की बात यह है कि कई घंटे इस अज्ञात शातिर ठग के डिजीटल अरेस्ट में रहने के कारण रिटायर्ड इंजीनियर सुध खो बैठे और उसके चंगुल में फंस गये। वो जैसे कहता रहा वो करते रहे। इस तरह दबाव डालकर और डराकर शातिर ठग ने राजेंद्र गोयल से कई खातों में 33 लाख से अधिक की रकम ट्रांसफर करा ली। इसके बाद आरोपियों के फोन नहीं आये राजेंद्र ने सम्पर्क करने का प्रयास किया तो सभी नंबर बंद आने लगे। ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित राजेंद्र ने पुलिस को सूचना दी और साइबर थाने में केस दर्ज कराया। साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।

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