“गरीब किसान की जमीन, पेट और भविष्य का सवाल”: विधायक नाहिद हसन ने वन विभाग के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

लखनऊ/शामली। केराना विधानसभा क्षेत्र में वर्षों से मेहनत-मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे गरीब और सीमांत किसानों की जमीन पर मंडरा रहे संकट को लेकर विधायक नाहिद हसन सामने आए हैं। उन्होंने वन विभाग द्वारा पट्टाधारकों की भूमि को कब्जे में लिए जाने के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखते हुए इसे किसानों के अस्तित्व से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।

अपने पत्र में विधायक नाहिद हसन ने स्पष्ट किया है कि जमींदारी विनाश अधिनियम लागू होने के बाद जनपद शामली सहित प्रदेश के कई जिलों में राजस्व विभाग द्वारा बंजर भूमि के रूप में दर्ज जमीनें पात्र गरीबों को पट्टे पर आवंटित की गई थीं। इन जमीनों पर किसान दशकों से खेती कर रहे हैं और यही उनकी रोज़ी-रोटी का एकमात्र सहारा है।

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विधायक ने पत्र में पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा है कि जिन भूमियों पर आज वन विभाग दावा कर रहा है, वे कभी भी संरक्षित वन नहीं रहीं। न ही इन पर पहले किसी प्रकार का वन अधिसूचना लागू थी। बावजूद इसके, अब 1955 के पुराने अभिलेखों का हवाला देकर हजारों किसानों की जमीन छीनने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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नाहिद हसन ने कहा कि यदि यह कार्रवाई नहीं रोकी गई तो हजारों परिवार सड़क पर आ जाएंगे। जनपद शामली में ही ऐसे प्रभावित परिवारों की संख्या हजारों में है, जबकि पूरे उत्तर प्रदेश में यह संकट लाखों गरीब किसानों को उजाड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन का नहीं, बल्कि गरीब के पेट और भविष्य का सवाल है।

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विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष से नियम 56 के तहत इस विषय को सदन में स्वीकार कराए जाने और इस पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने संबंधित विभाग के मंत्री को सदन में जवाबदेह बनाने का आग्रह किया है, ताकि किसानों के साथ हो रहे अन्याय को रोका जा सके।

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