सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ शिक्षकों ने की अध्यादेश लाने की मांग

टीईटी अनिवार्यता को लेकर आक्रोश, शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री कपिल देव को सौंपा ज्ञापन

मुजफ्फरनगर। सुप्रीम कोर्ट के हालिया टीईटी अनिवार्यता के आदेश से देशभर के शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इसी कड़ी में जनपद मुज़फ्फरनगर के सैकड़ों शिक्षक प्रदेश सरकार से राहत की उम्मीद लेकर राज्य के व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल के आवास पर पहुंचे। यहां उन्होंने मौजूदा हालात और संभावित समाधान को लेकर चर्चा के साथ ही ज्ञापन सौंपकर कोर्ट के आदेश के खिलाफ सरकार से अध्यादेश लायो जाने की मांग की है।

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मुज़फ्फरनगर में शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल से उनके मौहल्ला गांधीनगर स्थित आवास पर मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में दिये गये टीईटी अनिवार्यता के आदेश को समाप्त किए जाने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। मंत्री कपिल देव ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी नौकरी की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिब( है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में शिक्षकों की नौकरियों को खतरे में नहीं पड़ने दिया जाएगा। इस विषय पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शीघ्र ही चर्चा की जाएगी ताकि एक सकारात्मक और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

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शिक्षकों ने एक स्वर में मांग की कि केंद्र या राज्य सरकार को इस आदेश पर पुनर्विचार करते हुए अध्यादेश लाना चाहिए, जिससे न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रह सके। मुलाकात के दौरान मौजूद शिक्षकों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हजारों की संख्या में शिक्षकों की नौकरी पर संकट गहराता जा रहा है। इससे न केवल उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कपिल देव अग्रवाल ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस मसले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और जल्द ही उच्च स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अध्यादेश लाने की मांग को भी वो सरकार के सम्मुख रखेंगे, ताकि शिक्षकों को राहत दिलाई जा सके। 

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